
अहमदाबाद। इन दिनों गुजरात पाटीदार पटेलों द्वारा मांगे जा रहे आरक्षण की आंच से घिरा हुआ है। पटेलों को मनाने की राज्य सरकार की हर कोशिश विफल हो चुकी है और अब पूरे गुजरात में जगह-जगह रैली और प्रदर्शन हो रहे हैं। सूरत, वडोदरा, राजकोट, महेसाणा और पाटण जैसे शहर रैलियों-प्रदर्शन से हलकान हो गए हैं। वहीं, अब अहमदाबाद में 25 अगस्त को महारैली का आयोजन होना है, जिसमें 25 लाख से ज्यादा पटेलों के शामिल होने की संभावना है। प्रशासन ने इसके लिए कमर कस ली है।
हालांकि, गुजरात के लिए यह आंदोलन पहला नहीं है। इससे पहले भी यहां दो ऐसे बड़े आंदोलन हो चुके हैं, जिसमें राज्य के दो मुख्यमंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ गया था। इनमें से एक है.. 1975 में शुरू हुआ 'नवनिर्माण आंदोलन और इसके बाद 1981 से 1985 तक चला 'अनामत (आरक्षण) विरोधी आंदोलन। ये दोनों ही आंदोलन इतने व्यापक थे कि तत्कालीन राज्य सरकारों की नींव हिल गई थी।
नवनिर्माण आंदोलन में तत्कालीन मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल तो अनामत विरोधी आंदोलन में तत्कालीन मुख्यमंत्री माधवसिंह सोलंकी की कुसी चली गई थीं।