
मुंबई। देश में जहां हर तीसरा वयस्क व्यक्ति हायपर टेंशन से पीड़ित है। पश्चिमी देशों के लोगों की तुलना में भारतीय लोगों को दिल का दौरा एक दशक पहले पड़ने की आशंका होती है। ऐसे में हाल के सालों में मेडिकल टेस्ट को लेकर लोगों में जागरुकता बढ़ी है।
सामान्य बीमारी होने या न होने पर भी मेडिकल टेस्ट कराते हैं। मगर, मुंबई के आठ क्लीनिक और अस्पतालों की ओर से पेश किए जा रहे 25 हेल्थ पैकेज में किए जाने वाले कई परीक्षणों का समग्र स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं होता है। जबकि ये पैकेज 1650 रुपए से लेकर 59500 रुपए तक के हैं।
हाल ही में नेशनल मेडिकल जर्नल ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार शहरी भारत में होने वाले ज्यादातर रूटीन हैल्थ चैकअप का स्वास्थ्य से कोई लेना-देना नहीं है। डॉ. यश लोखंडवाला ने बताया कि विटामिन डी, विटामिन बी12, टीएसएच, इलेक्ट्रोलायट, पीएफटी जैसे टेस्ट गैर-जरूरी होते हैं।
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एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि कई अस्पताल हैल्थ चेकअप कराने को कहते हैं क्योंकि यह व्यक्ति को भर्ती करने का जरिया होता है। वे किसी हार्मोन या खून के किसी तत्व को बढ़ा हुआ देखते हैं और अस्पताल में भर्ती होने की सलाह देते हैं।
लिवर सर्जन डॉ. संजय नगराल, इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल इथिक्स के एडिटर हैं। उन्होंने बताया कि काफी समय से ऐसे सबूत मिल रहे थे कि हेल्थ चैकअप से स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ता है।