
जोधपुर। एक जटिल और दुर्लभ बाल चिकित्सा प्रक्रिया में 45 दिन की एक नवजात में एपिकार्डियल पेसमेकर सफलतापूर्वक लगाया गया। शुक्रवार को हुई इस सर्जरी के बाद बच्ची की स्थिति में सुधार है और उसे दो दिन बाद एमडीएम अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
इस बच्ची को एक दिन में 8 से 10 दौरे आते थे। न्यूरोलॉजिकल पोडिआट्रिस्ट मनीष पारेख ने कहा कि ऐसी सर्जरी राजस्थान के सरकारी अस्पताल में पहली बार हुई है। जांच करने पर पाया गया कि ये दौरे 'ब्रेडिकार्डिया' जो कि अचानक और लगातार हार्ट रेट गिरने के कारण से होता है।
वे कहते हैं ' पहले यह माना गया कि यह कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याओं जैसे मिर्गी के कारण हुआ लेकिन जांच करने पर हमने एमडीएम अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट्स को शामिल किया और उसके बाद एपिकार्डियल पेसमेकर इम्प्लांट करने का फैसला किया।'
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पीडियाट्रिक पेसमेकर की व्यवस्था करने और उसे शिशु में इम्प्लांट करने वाले कार्डियोलॉजिस्ट पवन सारड़ा के अनुसार यह बड़ी चुनौती थी।
डॉ. पवन के मुताबिक ' लेकिन हमने 'जननी शिशु सुरक्षा योजना' के तहत नि:शुल्क व्यवस्था कर ली और शुक्रवार को प्रत्यारोपण कर दिया।'
पारेख के मुताबिक बच्ची की स्थिति अब अच्छी है और कोई भी दौरे की स्थिति नहीं बनीं है। इससे साफ है कि पेसमेकर अच्छे से काम कर रहा है।'