
नीरज व्यास, इंदौर। आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को अब डिजिटल तकनीक से जोड़ा जा रहा है। मरीज को पंचकर्म की प्रक्रिया समझने के लिए न तो किसी से बार-बार पूछना पड़ेगा और न ही बीमारी के कारण बताने के लिए अधूरी जानकारी देनी होगी। शासकीय स्वशासी अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय के पंचकर्म विभाग से धन्वंतरि जयंती के मौके पर इसकी शुरुआत होने जा रही है।
इसके बाद अस्पताल के अन्य 7 विभागों में भी इस तरह की व्यवस्था को शुरू करने की योजना है। इसके अंतर्गत अब ओपीडी की पर्ची पर लगे एक क्यूआर कोड को स्कैन करते ही पंचकर्म की विभिन्न प्रक्रियाओं के वीडियो देखे जा सकेंगे।
वहीं, दूसरे ''''हेतु पत्रक'''' क्यूआर कोड के माध्यम से मरीज अपनी दिनचर्या, खानपान, जीवनशैली और मानसिक तनाव से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे।
इससे चिकित्सकों को बीमारी के मूल कारण और उसकी उत्पत्ति की प्रक्रिया समझने में मदद मिलेगी। इस पहल में पारंपरिक ओपीडी प्रिस्क्रिप्शन को डिजिटल स्वरूप दिया गया है।
पर्ची के फुटर में स्नेहन, स्वेदन, वमन, विरेचन, बस्ति, नस्य और रक्तमोक्षण जैसी प्रमुख पंचकर्म प्रक्रियाओं के अलग-अलग क्यूआर कोड दिए गए हैं।
मरीज या उनके परिजन मोबाइल से कोड स्कैन कर सीधे यूट्यूब पर संबंधित प्रक्रिया के वीडियो देख सकते हैं। इससे उपचार शुरू होने से पहले ही मरीज को प्रक्रिया की जानकारी मिलेगी और उसके मन में मौजूद आशंकाएं दूर होंगी।
इस पहल में पर्ची के शीर्ष पर दिया गया हेतु पत्रक क्यूआर कोड भी महत्वपूर्ण है। इसे स्कैन करने पर मरीज अपनी 24 घंटे की दिनचर्या, आहार-विहार, मानसिक तनाव और पुरानी बीमारियों से संबंधित जानकारी डिजिटल फार्म में भर सकेंगे। चिकित्सक इस जानकारी का विश्लेषण कर रोग के मूल कारण (हेतु) और रोगोत्पत्ति की प्रक्रिया (संप्राप्ति) को समझ सकेंगे। इससे उपचार की दिशा तय करने और मरीज की स्थिति के अनुरूप चिकित्सा पद्धति चुनने में मदद मिलेगी।
यह पहल आयुर्वेद के पारंपरिक सिद्धांतों को आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ने का प्रयास है। इससे मरीजों की सहभागिता बढ़ने के साथ चिकित्सा प्रक्रिया को अधिक जानकारीपूर्ण और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।
अष्टांग आयुर्वेद चिकित्सालय को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की ये पहल है। इसे पंचकर्म विभाग में शुरू किया जा रहा है। इससे मरीजों के मन में पंचकर्म से जुड़े सवालों के जवाब उन्हें आसानी से वीडियो के जरिए मिल जाएंगे। इसके साथ ही चिकित्सकों को भी मरीजों की बीमारी की जड़ तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
- डाॅ. अजीत कुमार ओझा, विभागाध्यक्ष, पंचकर्म, शा. अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय
हमने शासकीय अष्टांग चिकित्सालय को डिजिटल करने की शुरुआती पहल की है। इसके अंतर्गत पंचकर्म विभाग में नई व्यवस्था धन्वंतरि जयंती से शुरू होगी। इसके बाद आने वाले दिनों में चिकित्सालय के अन्य 7 विभागों में भी इस तरह की व्यवस्था को लागू करने की योजना है।
- डाॅ. अजित पाल सिंह चौहान, डीन, शासकीय स्वशासी अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय