• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • टेक्नोलॉजी
  • टेक गाइड

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 20, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अब 'ग्लास डिस्क' पर अरबों साल तक स्टोर रहेंगे डेटा

स्टोरेज डिवाइसेज के क्षेत्र में अब एक ऐसी तकनीक आ गई है, जिससे अरबों साल तक आपके डेटा स्टोर रहेंगे।

By Edited By:
Publish Date: Sat, 20 Feb 2016 12:02:20 AM (IST)Updated Date: Sat, 20 Feb 2016 12:06:21 AM (IST)
अब 'ग्लास डिस्क' पर अरबों साल तक स्टोर रहेंगे डेटा

मल्‍टीमीडिया डेस्‍क। स्टोरेज डिवाइसेज के क्षेत्र में अब एक ऐसी तकनीक आ गई है, जिससे अरबों साल तक आपके डेटा स्टोर रहेंगे। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ हैम्पटन के शोधकर्ताओं ने साधारण ग्लास जैसे दिखने वाले "इंटरनल स्टोरेज सिस्टम" का निर्माण किया है। इस पर लेजर तकनीक के जरिए 360 टीबी (टेराबाइट्स) तक का डेटा रिकॉर्ड किया जा सकता है।

ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च सेंटर के शोधकर्ताओं ने इस "सुपरमैन ग्लास क्रिस्टल" का निर्माण किया है। फिलहाल शोधकर्ता ऐसी कंपनियों की तलाश में हैं जो इसे मार्केट में उपलब्ध करवा सके। ऐसे स्टोर होगा डेटाग्लास डिस्क में तीन लेयर्स हैं जिनमें पांच माइक्रोमीटर्स की दूरी है।


शोधकर्ताओं ने फेम्टोसेकंड लेजर राइटिंग तकनीक अपनाई, जिसके जरिए उन्होंने ग्लास पर लिखा। इसमें कुछ क्रिस्टल्स होंगे जो लेजर तकनीक से आई लाइट को शब्दों में डिकोड कर लेंगे। बाद में इसे ऑप्टिकल माइक्रोस्कोप और पोलराइजर के जरिए पढ़ा जा सकेगा।

ग्लास डिस्क के फीचर्स

  • 360 टीबी स्टोरेज क्षमता।
  • 190 डिग्री पर 13.8 अरब वर्ष तक डेटा रहेगा स्टोर।
  • सामान्य तापमान पर लाइफटाइम स्टोरेज।

फायदे

  • लाइब्रेरी, म्यूजियम, कानून, नेशनल आर्काइव जैसे विभागों में डेटा स्टोरेज में आसानी।
  • कई वर्षों तक डाटा एक जैसे ही फॉर्म में रहेगा।
  • डिजिटल रिकॉर्ड से किताबें आदि खराब होने से भी नुकसान नहीं।
  • डिजिटल रूप में मौजूद डेटा का आसान एक्सेस।