संसद सत्र का पहला दिन पेगासस रिपोर्ट के नाम रहा। विपक्ष ने इस मुद्दे पर हंगामा मचाया और सरकार ने सफाई में इस रिपोर्ट को ही साजिश करार दिया। दरअसल रविवार रात को अमेरिका के कई मीडिया हाउस ने यह खबर दी कि Pegasus स्पाईवेयर का इस्तेमाल विश्व के कई देशों में हो रहा है, जिनमें भारत भी एक है। उसके बाद से विपक्ष पूरे जोश में है और सरकार को इस मुद्दे पर घेरने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक Pegasus स्पाईवेयर का प्रयोग फोन टैपिंग के जरिये जासूसी में किया जा रहा है और भारत के कई बड़े राजनेता, पत्रकार, एक्टिविस्ट और बिजनसमैन की इसके जरिये जासूसी की गयी है।

क्या है पेगासस?

Pegasus का अर्थ होता है उड़ने वाला घोड़ा। ये एक स्पाईवेयर है, यानी ऐसा सॉफ्टवेयर जिसका इस्तेमाल जासूसी में किया जा सके। सीधे शब्दों में कहें, तो यह सॉफ्टवेयर किसी भी फोन को हैक कर सकता है। इसे इसराइल की साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ने तैयार किया है, और बांगलादेश समेत कई देशों ने इसे खरीदा है। कंपनी का कहना है कि हम केवल सरकारों को सॉफ्टवेयर बेचते हैं और वह भी तब इसके जरिये किसी की जान बचानी हो। इसका आतंकवाद और अपराध के खिलाफ भी इस्तेमाल होता है। भारत के बारे में ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि सरकार ने एनएसओ से 'पेगासस' को खरीदा है या नहीं।

लेकिन इसके सरकारों द्वारा इसके दुरुपयोग के मामले भी सामने आते रहे हैं। मेक्सिको से लेकर सऊदी अरब की सरकार पर भी इसके गलत इस्तेमाल के आरोप लगाये जा चुके हैं। व्हाट्सऐप के स्वामित्व वाली कंपनी फेसबुक समेत कई दूसरी कंपनियों ने इस पर मुकदमे किए हैं। क्योंकि ये आसानी से उनसे सारे मैसेजेज पढ़ सकता है।

कैसे काम करता है Pegasus?

भारत में क्यों हो रहा है हंगामा?

द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक, पेगासस के बारे में लीक हुए डेटा में 300 भारतीय मोबाइल नंबर भी शामिल हैं। इनमें से 40 मोबाइल नंबर भारतीय पत्रकारों के हैं। इनके अलावा तीन बड़े विपक्षी नेता, मोदी सरकार में दो केंद्रीय मंत्री, सुरक्षा एजेंसियों के मौजूदा एवं पूर्व प्रमुख और कई बिजनेसमैन शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि इन नंबरों को 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले 2018-2019 के बीच निशाना बनाया गया था। कुछ बड़े नेताओं के नंबर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का नाम शामिल है।

खास बात ये है कि इस लिस्ट में बीजेपी सरकार के दो मंत्रियों अश्विनी वैष्णव और प्रह्ललाद पटेल का नाम भी सामने आया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को हाल ही मोदी कैबिनेट में शामिल किया है और वो खुद आईटी मंत्री हैं। वैसे जब 2018-19 में इनको टारगेट बनाने की बात आ रही है, उस वक्त वो एक सांसद थे।

क्या कहती है सरकार?

संसद में विपक्षी दलों ने Pegasus स्पाईवेयर के जरिये फोन टैपिंग और जासूसी के मसले पर जमकर हंगामा किया। लेकिन आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस आरोपों सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि देश में फोन टैपिंग को लेकर पहले से ही कड़े कानून हैं और ऐसा होना भारत में संभव नहीं है। मंत्री ने संसद सत्र से ठीक एक दिन पहले इस रिपोर्ट के सामने आने पर भी सवाल उठाये और कहा कि ये सरकार को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश लगती है।

Posted By: Shailendra Kumar

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