
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। दीपावली का उल्लास शहरभर में जारी है। इस दिन आतिशबाजी के साथ प्रभु श्रीराम का स्वागत होगा और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाएगी। घरों में दीपक जलेंगे, मिठाइयां बांटी जाएंगी और पटाखों की आवाज से आसमान गूंजेगा, लेकिन इस शोर और धुएं के बीच घरों में रहने वाले पालतू जानवरों और पक्षियों के लिए यह समय काफी मुश्किल भरा होता है।
पटाखों की तेज आवाज से श्वान-बिल्लियां डरकर छिपने लगते हैं। कई बार वे घबराहट में घर से बाहर भाग जाते हैं। वहीं पक्षियों पर भी तेज आवाज और पटाखों के धुएं का असर पड़ता है।
ऐसे में बाजार में कई तरह के डिवाइस और खास उत्पाद उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से पालतू जानवरों को सुरक्षित रखने और उनका तनाव कम करने में मदद मिल सकती है।
पेट स्टोर के संचालक किशोर सोलंकी के अनुसार, पालतू श्वानों के लिए नाइस रिडक्शन ईयरमफ्स का उपयोग किया जा सकता है।इन्हें जानवरों के कानों को ढकने के लिए बनाया जाता है।
इनका इस्तेमाल तेज आवाज के असर को कम करने के लिए किया जाता है। इनकी बनावट ऐसी होती है कि ये कानों के आसपास फिट हो सकें और जानवर को ज्यादा परेशानी भी न हो।
इसके साथ ही पटाखों की अचानक होने वाली तेज आवाज से बचाने के लिए व्हाइट नाइस मशीन भी एक विकल्प है। यह मशीन लगातार एक समान आवाज पैदा करती है।
इससे बाहर से आने वाली पटाखों की आवाज कुछ हद तक दब जाती है। जिनमें वर्षा, हवा, पंखे और पानी बहने जैसी आवाजों के विकल्प मिलते हैं।
कुत्तों और बिल्लियों में डर और घबराहट कम करने के लिए फेरोमोन डिफ्यूजर का उपयोग भी किया जा सकता है। पेट शाप संचालक मोहित धुलेरे के अनुसार, डिफ्यूजर को बिजली के साकेट में लगाया जाता है। यह कमरे में खास तरह के सिंथेटिक फेरोमोन छोड़ता है, जो कुछ जानवरों को शांत महसूस कराने में मदद कर सकते हैं। इसके साथ ही एंग्जायटी रैप या कैल्मिंग जैकेट भी पालतू जानवरों के लिए तैयार की जाती है। यह खास कपड़े से बनी होती है, जो श्वान के शरीर पर हल्का और एक समान दबाव बनाती है। इसका उद्देश्य जानवर को सुरक्षित और आरामदायक महसूस कराना है।
दीपावली के दौरान घरों में रखे तोते और दूसरे पक्षियों को भी तेज आवाज से परेशानी हो सकती है। इनके लिए केज कवर बाजार में उपलब्ध हैं। इन्हें पिंजरे के ऊपर लगाया जाता है, जिससे बाहर की रोशनी और आवाज का असर कुछ कम हो सकता है। इसके लिए मोटे और हवादार कपड़े का उपयोग किया जा सकता है।