शशांक शेखर भारद्वाज, कानपुर। वाहन दुर्घटना में घायल व्यक्ति हो या गोलाबारी में घायल जवान, अधिक खून बह जाने के कारण जान नहीं गंवानी पड़ेगी। देसी हीमोस्टेटिक टेप इस स्थिति में मददगार साबित होगा। यह मेडिकल टेप 30 सेकंड में खून का बहना रोक देगा।शरीर के किसी भी हिस्से से कितना ही तेज रक्तस्राव क्यों न हो रहा हो, महज 30 सेकंड और अधिकतम 70 सेकंड में पूरी तरह रोका जा सकेगा।
यह वह समय है, जिसमें खून का बहाव रोक दिया जाए तो जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। प्राथमिक उपचार किट में इस टेप के शामिल हो जाने पर आशातीत परिणाम की उम्मीद की जा रही है।
कानपुर आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) के बायोलॉजिकल साइंस एंड बायो इंजीनियरिंग (बीएसबीई) विभाग ने स्वदेशी तकनीक से पहला प्राकृतिक पॉलीमर बेस्ड स्वदेशी हीमोस्टेटिक बैंडेज टेप तैयार किया है। यह खून में थक्का बनने की प्रक्रिया को बढ़ाकर कोशिकाओं को तेजी से भर देने का काम करता है।
जानवरों पर सफल परीक्षण के बाद दिल्ली एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) में इसका क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो गया है। शुरुआती परिणाम सकारात्मक आने के बाद इसे पेटेंट कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) के इंपैक्टिंग रिसर्च इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी (इमप्रिंट) के सहयोग से प्रो. अशोक कुमार और पीएचडी कर रहे सैय्यद मुंतजिर ने डेढ़ साल में हीमोस्टेटिक बैंडेज को विकसित किया है। इसे ब्रेस्ट इंप्लांट, लिवर सर्जरी के समय भी लगाया जा सकता है। वहीं, चोट लगने पर बिना विशेषज्ञ के भी आसानी से लगा सकते हैं। चोट लगने पर शरीर की कोशिकाएं और ऊतक समय के अनुसार उसे स्वतः भर देते हैं।
पॉलीमर हीमोस्टेटिक बैंडेज भी ऐसे ही काम करता है। इसके चार मुख्य भाग हैं। पहला, नैचुरल पॉलीमर, यह प्लेटलेट्स को रोकता है। दूसरा, मॉलीक्यूलर सीव, यह आण्विक छलनी है, जिसमें नैनो आकार के छिद्र होते हैं, जो खून को जमाने में सहायक होते हैं। तीसरा, कैल्शियम परत, बहते हुए खून को जमाने में सहयोग करती है। चौथा, डेरिवेटिव्स ऑफ पॉलीसैकराइड्स, यह पूरी प्रक्रिया को एक दूसरे से जोड़ता है। प्लेटलेट्स को इकट्ठा करता है, खून को जमाता है, कोशिकाओं को सक्रिय करता है। इस टेप की बड़ी खूबी यह भी है कि अत्यधिक गर्मी और अत्यधिक सर्दी वाले स्थान पर भी यह उतना ही कारगर है।
कम लागत, और सस्ता होगा
आईआईटी की लैब में तैयार 5 गुणा 8 यानी 40 वर्ग सेंटीमीटर के बैंडेज की उत्पादन लागत करीब 200 रुपए है। उत्पादन बढ़ने पर इसकी कीमत काफी कम हो जाएगी।
यह स्वदेशी और प्राकृतिक तकनीक पर आधारित है। इससे सड़क हादसों में घायल हुए लोगों की जान बचाई जा सकती है। एम्स में क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है। यह दुष्प्रभाव रहित भी है। - प्रो. अशोक कुमार, बीएसबीई विभाग, आईआईटी कानपुर
यह भी जानें :-
- अमेरिकी सेना हीमोस्टेटिक टेप का प्रयोग करती है
- जापान सहित कई देशों में पॉलीमर बेस्ड हीमोस्टेटिक बैंडेज पर शोध अभी शुरुआती स्तर पर
- ब्लड क्लाटिंग फैक्टर खोजे गए हैं लेकिन तेज गति के रक्तस्राव, अत्यधिक गर्मी और अत्यधिक सर्दी वाले स्थान पर वह कारगर नहीं
- कई देशों ने खून जमाने वाली क्रीम भी बनाने की कोशिश, पर अधिक सफल नहीं
- भारत में भी कुछ विश्वविद्यालय शोध कर रहे हैं लेकिन क्लीनिकल ट्रायल के स्तर पर नहीं पहुंचे
- आईआईटी बीएचयू ने जले कटे पर लगाने के लिए घुलने वाला बैंडेज तैयार किया है। इसका क्लीनिकल ट्रायल होना बाकी है।