
टेक्नोलॉजी डेस्क। देश में त्योहारों की शुरुआत के साथ ही ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर बंपर सेल और छूट की भरमार है। त्योहार की इसी हलचल के बीच साइबर जालसाज भी मासूम लोगों की मेहनत की कमाई हड़पने की फिराक में जुट गए हैं। नामी कंपनियों के फर्जी प्रोफाइल तैयार कर, लुभावने ऑफर्स के नाम पर खतरनाक पेमेंट लिंक भेजकर और मोबाइल में दुर्भावनापूर्ण एपीके (APK) फाइलें इंस्टॉल करवाकर यूजर्स को निशाना बनाया जा रहा है। इस तरह के वित्तीय फ्रॉड को अंजाम देने के लिए जालसाज सबसे अधिक व्हाट्सएप का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ठग कभी मुफ्त उपहार, कूपन और लॉटरी का झांसा देते हैं, तो कभी पार्सल डिलीवरी में समस्या का बहाना बनाकर लोगों को भ्रमित करते हैं। कई मामलों में तो जालसाज खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसियों या सरकारी विभागों का अधिकारी बताकर कानूनी कार्रवाई का खौफ दिखाते हैं, ताकि घबराहट में यूजर पैसे ट्रांसफर कर दे। हालांकि, व्हाट्सएप में उपलब्ध कुछ जरूरी सुरक्षा टूल्स को सक्रिय करके इन साइबर हमलों से सुरक्षित रहा जा सकता है।
साइबर ठग अक्सर अनचाही कॉल करके तुरंत दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। इससे बचने के लिए ऐप में 'साइलेंस अननोन कॉलर्स' (Silence Unknown Callers) का विकल्प सक्रिय किया जा सकता है। इसे चालू करने के बाद किसी भी गैर-सहेजे गए नंबर से आने वाली कॉल की घंटी सीधे फोन पर नहीं बजती, बल्कि वह सिर्फ कॉल्स हिस्ट्री में दिखाई देती है।
इसे एक्टिव करने के लिए यूजर को व्हाट्सएप सेटिंग्स में जाकर 'प्राइवेसी' सेक्शन चुनना होगा और वहां 'कॉल्स' के तहत इस विकल्प को ऑन करना होगा।
अज्ञात नंबरों से आने वाली कॉल्स के प्रति सतर्कता बरतने के लिए एंड्रॉयड डिवाइस पर कॉलिंग स्क्रीन पर ही अतिरिक्त विवरण दिखाई देता है। इससे यह तुरंत स्पष्ट हो जाता है कि संबंधित नंबर किसी साझा ग्रुप से जुड़ा है या नहीं, अथवा वह अंतरराष्ट्रीय नंबर तो नहीं है। यह जानकारी बातचीत शुरू होने से पहले ही कॉल के फर्जी होने का संकेत दे देती है।
अकाउंट को अनधिकृत पहुंच या क्लोनिंग से बचाने के लिए 'टू-स्टेप वेरिफिकेशन' (Two-Step Verification) अनिवार्य सुरक्षा कवच का काम करता है। पारंपरिक छह अंकों वाले संख्यात्मक पिन के साथ-साथ अब यूजर मजबूत अक्षरों और विशेष प्रतीकों (Special Characters) से युक्त पासवर्ड का उपयोग करके अपनी प्रोफाइल को सुरक्षित रख सकते हैं।
संदिग्ध डिस्काउंट या अचानक लॉटरी लगने के किसी भी लुभावने मैसेज पर तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें। ऐसे नंबरों को ब्लॉक और रिपोर्ट करने के साथ-साथ किसी भी अज्ञात लिंक या डाउनलोड फाइल को न खोलें। ऐप का 'कॉन्टेक्स्ट कार्ड' फीचर ऐसी अजनबी चैट्स के बारे में अहम ब्योरा देता है, जैसे कि खाता कब तैयार किया गया था और वह नंबर किस देश से संचालित हो रहा है।
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धोखेबाज कई बार पीड़ितों के व्हाट्सएप का अनधिकृत एक्सेस पाने के लिए अन्य सिस्टम से लिंक करने का प्रयास करते हैं। ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर ऐप यूजर को तुरंत चेतावनी संदेश भेजता है।
सुरक्षा के लिहाज से कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ लिंकिंग कोड साझा न करें और न ही किसी असत्यापित क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करें। सेटिंग्स में जाकर 'लिंक्ड डिवाइसेज' सूची की लगातार जांच करते रहें और यदि कोई अपरिचित सिस्टम जुड़ा दिखे, तो उसे तत्काल वहां से रिमूव कर दें।
यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि कोई भी पुलिस विभाग या सरकारी जांच एजेंसी वीडियो कॉल अथवा सामान्य फोन कॉल के माध्यम से पूछताछ या कानूनी कार्रवाई नहीं करती है। ऐसे किसी भी कॉल से डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। यदि किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी या संदिग्ध लेन-देन का अंदेशा हो, तो बिना समय गंवाए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।