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क्या इस्लाम में जरूरी है हिजाब? इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला, कहा- 'इसका कोई प्रमाण नहीं'; समझिए पूरा मामला

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल से जुड़े मामले में नाबालिग छात्रा की याचिका खारिज कर दी।

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Tue, 25 Aug 2026 03:01:57 PM (IST)Updated Date: Tue, 25 Aug 2026 03:09:48 PM (IST)
क्या इस्लाम में जरूरी है हिजाब? इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला, कहा- 'इसका कोई प्रमाण नहीं'; समझिए पूरा मामला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नाबालिग छात्रा की याचिका खारिज की (AI Generated Image)

HighLights

  1. स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति नहीं
  2. टैगोर पब्लिक स्कूल ने समान ड्रेस कोड का हवाला दिया
  3. छात्रा ने अनुच्छेद 14 और 19(1)(ए) का तर्क दिया

डिजिटल डेस्क, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्कूलों में ड्रेस कोड से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कहा है कि निर्धारित स्कूल यूनिफॉर्म के साथ अतिरिक्त रूप से स्कार्फ अथवा हिजाब पहनने की अनुमति नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यूनिफॉर्म का उद्देश्य विद्यार्थियों में अनुशासन और समानता की भावना विकसित करना, संस्थान की पहचान बनाए रखना तथा पंथनिरपेक्ष वातावरण को बढ़ावा देना है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने नाबालिग छात्रा की याचिका खारिज कर दी।

जस्टिस जे जे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की दो जजों की बेंच ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाई कि सिर पर स्कार्फ पहनना एक जरूरी धार्मिक प्रथा है, जिसके बिना उसका धर्म खतरे में पड़ जाएगा।


टैगोर पब्लिक स्कूल से जुड़ा है मामला

मामला प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल की नाबालिग छात्रा सुकैना रिजवी से जुड़ा है। छात्रा ने स्कूल की निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ अतिरिक्त रूप से स्कार्फ यानी हिजाब पहनकर कक्षा में बैठने की अनुमति मांगी थी। उसका कहना था कि वह कक्षा छह से ही स्कार्फ पहनकर स्कूल आती रही है और तब स्कूल की ओर से इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई।

कक्षा 11 में प्रवेश के समय स्कूल प्रबंधन ने छात्रा को बताया कि स्कार्फ पहनकर आना निर्धारित ड्रेस कोड का उल्लंघन है। इसी आधार पर उसे प्रवेश देने से इनकार किया गया। इसके बाद छात्रा ने जिलाधिकारी के समक्ष दो शिकायती पत्र प्रस्तुत किए। जिलाधिकारी की ओर से रिपोर्ट मांगे जाने पर सहायक डीआइओएस ने दोनों पक्षों को सुनकर मामले की जानकारी ली।

स्कूल ने समान ड्रेस कोड का दिया हवाला

स्कूल की प्रधानाचार्या ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि टैगोर पब्लिक स्कूल एक सह शिक्षा संस्था है, जहां अलग-अलग समुदायों के बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल में सभी विद्यार्थियों के लिए समान ड्रेस कोड लागू है। प्रधानाचार्या के अनुसार किसी एक छात्रा को ड्रेस कोड में विशेष छूट देने से संस्थान की निर्धारित व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

छात्रा ने मौलिक अधिकारों का दिया तर्क

छात्रा की ओर से पेश वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि स्कार्फ पहनना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा है। वकील ने इसे छात्रा की गरिमा और शारीरिक स्वायत्तता से भी संबंधित बताया। उनका कहना था कि स्कार्फ पहनना छात्रा के धार्मिक आचरण का हिस्सा है और इसे रोकना संविधान के अनुच्छेद 14 तथा अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।

राज्य सरकार और सीबीएसई का पक्ष

राज्य सरकार तथा सीबीएसई की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि संबंधित स्कूल निजी गैर-सहायता प्राप्त संस्था है और राज्य के प्रत्यक्ष नियंत्रण के अधीन नहीं आता। उनके अनुसार स्कूल में यूनिफॉर्म निर्धारित करना प्रशासन की नीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच एकरूपता बनाए रखना है।

पहले अनुमति मिलने पर कोर्ट की टिप्पणी

हाई कोर्ट ने छात्रा की उस दलील पर भी विचार किया कि कक्षा छह से स्कार्फ पहनने पर पहले कभी आपत्ति नहीं की गई थी। कोर्ट ने कहा कि पहले आपत्ति नहीं जताया जाना ढिलाई, लापरवाही, इच्छाशक्ति की कमी या शालीनता जैसे कारणों से भी हो सकता है। इसलिए पहले किसी कार्रवाई का न होना ड्रेस कोड में स्थायी छूट का आधार नहीं माना जा सकता।

केरल हाई कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने फातिमा तस्नीम बनाम केरल राज्य मामले में केरल हाई कोर्ट की टिप्पणी का भी उल्लेख किया। उस मामले में कहा गया था कि छात्रा का अपनी ड्रेस चुनने का अधिकार और शैक्षणिक संस्था का प्रबंधन करने का अधिकार, दोनों मौलिक अधिकारों से जुड़े हैं। दोनों अधिकारों के बीच टकराव की स्थिति में संस्था के व्यापक हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नाबालिग छात्रा की याचिका खारिज कर दी।