
डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश में यातायात के एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने हाल ही में कोच्चि मेट्रो के विशेषज्ञों के साथ बैठक कर गोमती नदी में वाटर मेट्रो के संचालन की तकनीकी व्यवहारिकता रिपोर्ट पर चर्चा की। यह परियोजना मुख्यमंत्री के 'ड्रीम प्रोजेक्ट' का हिस्सा है, जो प्रदेश में जल परिवहन के साथ-साथ पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
सरकार की योजना केवल लखनऊ तक सीमित नहीं है। गोमती में सफल परीक्षण के बाद इसे राज्य के अन्य प्रमुख जल निकायों में भी विस्तार दिया जाएगा, जिसमें मथुरा से यमुना नदी पर आगरा तक, गोरखपुर में रामगढ़ ताल, बलिया में सुरहा ताल और गंगा नदी में भी वाटर मेट्रो संचालन की योजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
वाटर मेट्रो महज एक नाव नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक से लैस परिवहन व्यवस्था होगी। परियोजना को धरातल पर उतारने से पहले कई जटिल तकनीकी और पर्यावरणीय अध्ययन किए जा रहे हैं। वाटर मेट्रो से न केवल लोगों को आधुनिक परिवहन सुविधा मिलेगी, बल्कि इससे पर्यटन को बढ़ावा, रोजगार के नए अवसर और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
इसमें ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन (AFC), पैसेंजर काउंटिंग सिस्टम और इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट, टर्मिनल और जेट्टी का निर्माण, 11 केवी हाईटेंशन इलेक्ट्रिकल लाइन, बोट चार्जर और एचवीएसी (HVAC) सिस्टम का विस्तृत अध्ययन शामिल है।
परिवहन मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन सभी तकनीकी अध्ययनों के आधार पर जल्द से जल्द डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाए। डीपीआर के माध्यम से ही परियोजना की लागत तय होगी और बजट आवंटन के बाद निविदाएं (Tenders) आमंत्रित की जाएंगी।