डिजिटल डेस्क, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और मजबूत बनाने के लिए चार महत्वपूर्ण लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के विकासकर्ताओं के चयन को मंजूरी प्रदान की गई।
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) पद्धति पर विकसित की जाने वाली इन परियोजनाओं पर लगभग 17,542.06 करोड़ रुपये का संभावित व्यय भार आएगा।
कैबिनेट ने जिन चार परियोजनाओं के विकासकर्ताओं के चयन को मंजूरी दी है, उनमें फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के पैकेज-1 एवं पैकेज-2, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला लिंक एक्सप्रेसवे, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के पैकेज-1 एवं पैकेज-2 तथा जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के पैकेज-1 एवं पैकेज-2 शामिल हैं।
वहीं, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली परियोजना से प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच आवागमन को गति मिलेगी। जेवर लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना से जेवर क्षेत्र और एक्सप्रेसवे नेटवर्क के बीच संपर्क बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
'पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क' के मास्टर डेवलपर चयन को मंजूरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में 'पीएम मित्र योजना' के तहत लखनऊ-हरदोई सीमा पर 1,000 एकड़ (404.69 हेक्टेयर) भूमि पर विकसित किए जा रहे 'पीएम मित्र मेगा एकीकृत वस्त्र क्षेत्र एवं परिधान पार्क' (पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क) के मास्टर डेवलपर चयन हेतु प्राप्त एकल बिड को स्वीकार करते हुए 'मैसर्स रामकी इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड' को 'प्रेफर्ड बिडर' के रूप में चयनित करने के प्रस्ताव पर अपनी औपचारिक मुहर लग गई है।
प्रदेश के हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने कहा कि 1,947 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार होने वाली इस विश्वस्तरीय परियोजना में भारत सरकार द्वारा 30 प्रतिशत (अधिकतम 500 करोड़ रुपए) तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। यह परियोजना स्थानीय बुनकरों, परिधान निर्माताओं और निर्यातकों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।
हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार सागर ने बताया पीएम मित्र पार्क का विकास एवं संचालन भारत सरकार तथा उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त स्वामित्व वाले स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) 'पीएम मित्र पार्क उत्तर प्रदेश लिमिटेड' के माध्यम से किया जा रहा है। इस उपक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत और भारत सरकार की 49 प्रतिशत अंशधारिता है।
छोटे किसानों और उद्यमियों को योगी सरकार का तोहफा
उत्तर प्रदेश में पशुपालन को किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार सृजन का सशक्त माध्यम बनाने के लिए योगी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट ने राज्य पशुधन मिशन (एसएलएम) को मंजूरी दी।
इसका उद्देश्य पशुधन अर्थव्यवस्था को संगठित कर आधुनिक तकनीक, उद्यमिता और वैश्विक व्यापार से जोड़ना है। मिशन में विशेष रूप से लघु एवं सीमांत किसानों और उद्यमियों पर ध्यान दिया जाएगा।
पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक पशुधन वाला राज्य है और दुग्ध उत्पादन में पहले स्थान पर है। अब उत्पादकता, बाजार व्यवस्था, मूल्य संवर्धन और डिजिटल प्रबंधन को मिशन के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्नत नस्लों से बढ़ेगी उत्पादकता
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश में पहली बार राज्य पशुधन मिशन को मंजूरी दी गई है। साहीवाल, देसी और हरियाणवी जैसी उन्नत नस्लों के विकास और नस्ल सुधार पर जोर दिया जा रहा है।
साथ ही एक उन्नत गाय के लिए 40 हजार रुपये और दो के लिए 80 हजार रुपये अनुदान का प्रावधान है। बकरी, भेड़, शूकर और मुर्गी पालन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा जरूरतमंद परिवारों को सौ-सौ चूजे भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
पांच उप-मिशनों से बढ़ेगी उद्यमिता
पशुधन मंत्री ने बताया कि उद्यमिता को पांच उप-मिशन के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें पशुधन उद्यमिता एवं स्टार्टअप विकास, पशुधन एवं पोल्ट्री नस्ल विकास, नवाचार एवं डिजिटल लाइवस्टॉक, चारा एवं आहार विकास तथा अनुसंधान, वैश्वीकरण एवं ज्ञान प्रणाली विकास शामिल हैं।
इनके माध्यम से लाइवस्टॉक स्टार्टअप्स, चारा उत्पादन, मूल्य संवर्धन, उत्पादक संगठनों और सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा। एआई, डिजिटल ट्रेसबिलिटी और जलवायु अनुकूल तकनीकों से पशुधन उत्पादों की गुणवत्ता तथा बाजार पहुंच बढ़ाने पर जोर रहेगा। प्रशिक्षण से पशुपालकों का कौशल विकास भी किया जाएगा।
सीधे खाते में पहुंचेगा अनुदान
उन्होंने बताया कि यह राज्य वित्तपोषित योजना है। निर्धारित माइलस्टोन पूरे होने, स्क्रीनिंग समिति की प्रक्रिया और पीएसी की स्वीकृति के बाद चयनित परियोजनाओं का अनुदान सीधे लाभार्थियों के खातों में जाएगा। अवसंरचना निर्माण और सेवाओं के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
प्रयागराज में हाईकोर्ट के अधिकारियों के लिए बनेंगे 845 नए आवास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिकारियों के लिए 845 नए सरकारी आवासों के निर्माण से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। वित्त व संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि इसके तहत हाईकोर्ट के क्लास-1 और क्लास-2 श्रेणी के अधिकारियों के लिए टाइप-3 के 533 और टाइप-4 के 312 आवास बनाए जाएंगे।
इन आवासों के निर्माण पर 543.4075 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके लिए 50 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त करने के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट की मंजूरी प्राप्त करने का प्रस्ताव है।
अभी केवल 128 फ्लैट या आवास उपलब्ध हैं
इलाहाबाद हाईकोर्ट में क्लास-1 और क्लास-2 श्रेणी के अधिकारियों के कुल 2,607 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 1,866 पदों पर अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि इन अधिकारियों के लिए केवल 128 फ्लैट या आवास उपलब्ध हैं। हाईकोर्ट में कार्यरत अधिकारियों को सरकारी आवास उपलब्ध कराने की अपेक्षा की गई थी। आवासों की इस कमी को देखते हुए नए आवासों के निर्माण की योजना तैयार की गई है।
10.37 एकड़ भूमि पर होगा निर्माण
प्रयागराज के देवघाट झलवा क्षेत्र में स्थित 10.37 एकड़ भूमि पर निर्धारित मानकों के अनुसार 845 आवासों का निर्माण कराया जाएगा। इसमें टाइप-3 श्रेणी के 533 और टाइप-4 श्रेणी के 312 आवास शामिल हैं। इन आवासों के निर्माण के लिए पहले 560.0420 करोड़ रुपये की धनराशि का प्रस्ताव तैयार किया गया था।
कुल 543.4075 करोड़ रुपये की धनराशि अनुमोदित
30 जून 2026 को हुई व्यय वित्त समिति की बैठक में प्रस्तावित लागत के सापेक्ष कुल 543.4075 करोड़ रुपये की धनराशि अनुमोदित की गई। वित्त विभाग के परामर्श के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 में 845 आवासों के निर्माण के लिए इतनी ही धनराशि की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने का प्रस्ताव है।
वहीं इसके साथ ही निर्माण कार्य के लिए 50 करोड़ रुपये अवमुक्त किए जाने के प्रस्ताव को भी मंत्रिपरिषद के समक्ष अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया गया है। इस परियोजना से इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिकारियों के लिए आवासीय सुविधा बढ़ाने और लंबे समय से चली आ रही आवासों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।
सैनिक स्कूल मैनपुरी के विकास को मिलेगी रफ्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में सैनिक स्कूल, मैनपुरी के विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रस्ताव मंजूर किया गया। सैनिक स्कूल में विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए ग्राम सभा नौनेर की 9.524 हेक्टेयर भूमि निशुल्क पुनर्ग्रहित कर सैनिक स्कूल सोसाइटी, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार को निशुल्क हस्तांतरित की जाएगी। इस निर्णय से स्कूल में जरूरी बुनियादी सुविधाओं के विकास का रास्ता साफ होगा।
सैनिक स्कूल में निर्माण कार्यों को मिलेगी गति
वित्त व संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि सैनिक स्कूल, मैनपुरी के परिसर में पहले से उपलब्ध भूमि के बीच से दो उच्चदाब विद्युत लाइनें गुजर रही हैं। इनके कारण परिसर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा निर्माण कार्यों के लिए अनुपयुक्त हो गया है। इसी वजह से स्कूल में विभिन्न निर्माण कार्यों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता बताई गई।
इसी आवश्यकता के आधार पर ग्राम सभा नौनेर, तहसील एवं जनपद मैनपुरी में स्थित भूमि को उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। कैबिनेट की मंजूरी के मुताबिक खाता संख्या 03560, गाटा संख्या 9470 मि. की 9.524 हेक्टेयर भूमि का नि:शुल्क पुनर्ग्रहण कर उसे पहले माध्यमिक शिक्षा विभाग के निवर्तन पर रखा जाएगा। इसके बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से यह भूमि सैनिक स्कूल सोसाइटी, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार को नि:शुल्क हस्तांतरित की जाएगी।
कैडेटों और कर्मचारियों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
भूमि उपलब्ध होने के बाद मैनपुरी सैनिक स्कूल में कैडेटों के उपयोग के लिए विभिन्न अवस्थापना सुविधाओं का निर्माण होगा। इसके साथ ही शिक्षण और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए भी जरूरी सुविधाएं विकसित होंगी। इससे स्कूल में शैक्षणिक गतिविधियों और अन्य कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने में मदद मिलेगी।
प्रयागराज में ऑडिटोरियम और कामकाजी महिलाओं के छात्रावास
कैबिनेट बैठक में प्रयागराज के सिविल स्टेशन स्थित नजूल भूखंड संख्या-यूईए-3 (किताब घर) की 7,912 वर्गमीटर भूमि नगर निगम, प्रयागराज को निशुल्क आवंटित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इस भूमि पर ऑडिटोरियम और कामकाजी महिलाओं के छात्रावास का निर्माण किया जाएगा।
यह भूमि नगर विकास विभाग के माध्यम से नगर निगम, प्रयागराज को प्रभावी जिलाधिकारी सर्किल दर पर छूट देते हुए निर्धारित शर्तों और प्रतिबंधों के अधीन निशुल्क आवंटित की जाएगी। यह हस्तांतरण अपवादस्वरूप होगा और इसे भविष्य में अन्य मामलों के लिए उदाहरण नहीं माना जाएगा।