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डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के लिए योगी सरकार में पुलिस और प्रशासन ने कई स्तरों पर कार्रवाई की है। साइबर अपराध से लेकर माफिया और इनामी अपराधियों तक, सरकार ने बड़े पैमाने पर शिकंजा कसा है।
यूपी पुलिस साइबर अपराध की रोकथाम के लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने संचालित कर रही है। इसके साथ ही सभी जनपदों के पुलिस थानों में साइबर सेल और हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है। साइबर अपराध पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से अगस्त 2019 से जून 2026 तक 874 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज या होल्ड कराई गई है।
इन उपलब्धियों के आधार पर मार्च 2026 में साइबर अपराध संबंधी रैंकिंग में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा। यह उपलब्धि यूपी पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
आंकड़ों के अनुसार 20 मार्च 2017 से अब तक पुलिस मुठभेड़ों में 303 अपराधी मारे गए, जबकि 12,202 अपराधी घायल हुए हैं। इसी अवधि में 23,601 इनामी अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। पुलिस की इस सख्त कार्रवाई से प्रदेश में अपराधियों में खौफ है।
अवैध संपत्तियों पर भी सरकार ने बड़ा प्रहार किया है। गैंगस्टर एक्ट के तहत 87,835 अपराधियों और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत 995 अपराधियों पर कार्रवाई की गई। गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत 152 अरब 33 करोड़ रुपये से अधिक यानी करीब 15,233 करोड़ रुपये मूल्य की अवैध चल-अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं।
प्रदेश स्तर पर चिह्नित 68 माफिया और उनके गिरोह के सदस्यों एवं सहयोगियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई। इनके विरुद्ध कुल 909 मुकदमे दर्ज किए गए, जबकि 651 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। योगी सरकार का कहना है कि प्रदेश में संगठित अपराध और माफियाराज को खत्म करने के लिए यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।