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'ताजमहल नहीं 'तेजो महालय' है...' परिसर के सर्वे के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर, सोमवार को सुनवाई संभव

आगरा के विश्व प्रसिद्ध ताजमहल को 'तेजो महालय' शिव मंदिर होने का दावा करने वाले मामले में एक नया मोड़ आया है। परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने (सर्वे...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Sat, 04 Jul 2026 03:18:21 PM (IST)Updated Date: Sat, 04 Jul 2026 03:36:09 PM (IST)
'ताजमहल नहीं 'तेजो महालय' है...' परिसर के सर्वे के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर, सोमवार को सुनवाई संभव
'ताजमहल नहीं 'तेजो महालय' है...'

HighLights

  1. ताजमहल को 'तेजो महालय' शिव मंदिर बताने वाले मामले में नई याचिका
  2. परिसर के वैज्ञानिक सर्वे के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में गुहार
  3. आगरा कोर्ट से सर्वे की अर्जी खारिज होने के बाद पहुंचे हाई कोर्ट

एजेंसी, प्रयागराज। आगरा के विश्व प्रसिद्ध ताजमहल को 'तेजो महालय' शिव मंदिर होने का दावा करने वाले मामले में एक नया मोड़ आया है। परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने (सर्वे कमिश्नर नियुक्त करने) की मांग को लेकर अब इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। इस महत्वपूर्ण याचिका पर आगामी सोमवार को सुनवाई होने की उम्मीद है।

यह याचिका आगरा की जिला अदालत और सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के उन फैसलों के खिलाफ दायर की गई है, जिन्होंने विवादित परिसर के सर्वे के लिए एडवोकेट कमीशन नियुक्त करने की मांग को खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, ताजमहल परिसर में 'भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर' होने के दावे से जुड़ा मुख्य दीवानी मुकदमा साल 2015 से आगरा की सिविल कोर्ट में लंबित है।


याचिका में क्या की गई है मांग?

लंबित मुख्य मुकदमे में अदालत से यह घोषित करने का आग्रह किया गया है कि ताजमहल का वर्तमान ढांचा वास्तव में एक प्राचीन शिव मंदिर (तेजो महालय) है। इसी केस की सुनवाई के दौरान साक्ष्य जुटाने के लिए परिसर का सर्वेक्षण कराने का प्रार्थना पत्र दिया गया था, जिसे निचली अदालतों ने यह कहते हुए टाल दिया था कि इस स्तर पर ऐसा कोई आदेश नहीं दिया जा सकता।

किसने दायर की याचिका और कौन हैं विपक्षी?

यह याचिका स्वयं 'भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय' की ओर से उनके 'वाद मित्र' (Next Friend) प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन और पांच अन्य सनातन धर्मियों द्वारा संयुक्त रूप से दाखिल की गई है।

इस कानूनी लड़ाई में निम्नलिखित पक्षों को प्रतिवादी (विपक्षी) बनाया गया है...

  • भारत सरकार (गृह/संस्कृति मंत्रालय)
  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)
  • दो अन्य संबंधित पक्षकार

हाई कोर्ट अब इस बात पर विचार करेगा कि क्या ऐतिहासिक परिसर की वास्तविक स्थिति और धार्मिक इतिहास को स्पष्ट करने के लिए सर्वेक्षण की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।

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