हस्तिनापुर के राजा महराज पांडू के पुत्र महारथी अर्जुन को युग का सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी माना गया है। आइए जानते है कैसे अभिमन्यु को महाभारत युद्ध का सबसे बड़ा महारथी माना गया है?
महाभारत का युद्ध सदी का सबसे भयंकर युद्ध माना जाता है। इस युद्ध में पुरे कुरुवंश का नाश हो गया था। लेकिन इस युद्ध में एक ऐसा भी योद्धा था, जिसने युद्ध में सबसे भयंकर युद्ध किया था।
अर्जुन ने प्रथम विवाह द्रुपद की पुत्री द्रौपदी से किया था। द्रौपदी जब आशीर्वाद लेने अर्जुन की माता के पास गई तब अनजाने में उन्होंने कह दिया कि अर्जुन ने जो भी हासिल किया है वो पांचों भाई आपस में बांट ले।
अर्जुन द्रौपदी के चीर हरण के पश्चात जब द्वारका के प्रस्थान पर थे तो संधि कृष्ण जी की बहन सुभद्रा से विवाह कर लिया था।
सुभद्रा से अर्जुन को अभिमन्यु की प्राप्ति हुई थी। अभिमन्यु का प्रशिक्षण मामा बलराम और मामा श्री कृष्ण ने किया था। साथ ही, अभिमन्यु को धनुष चलाने का प्रशिक्षण भी अर्जुन से प्राप्त था।
अभिमन्यू की गिनती महान योद्धाओं में होती है। महाभारत के रण में अभिमन्यू ने अपनी शानदार युद्ध कौशल से कर्ण, दुर्योधन, गुरु द्रोणाचार्य और पितामाह भीष्ण को कड़ी टक्कर दी थी।
महाभारत के रण में अर्जुन और श्री कृष्ण को एक दिन के लिए कही और युद्ध के लिए जाना पड़ा था। इस दौरान गुरु द्रोणाचार्य के चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए अभिमन्यू आगे आए थे।
अभिमन्यु जब चक्रव्यूह को तोड़ रहे थे, तो उसी दौरान कर्ण, दुर्योधन और 99 कौरव पुत्र, गुरु द्रोण, अश्वत्थामा ने छल से उनका वध कर दिया था। एक अभिमन्यु को मारने के लिए कई महारथियों को एक होना पड़ा था।
अभिमन्यू का वध करते हुए कर्ण ने कहा था कि महाभारत के इस युद्ध में न ही अर्जुन और न ही कर्ण सबसे बड़ा योद्धा होंगे। बल्कि महाभारत का सर्वश्रेष्ठ योद्धा अभिमन्यू को माना जाएगा।