पूजा पाठ को लेकर हिंदू धर्म में कई नियम बनाए गए है। नियमों का पालन करने से देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए। आइए जानते है सूर्य को अर्घ्य देने के पीछे के ज्योतिष कारणों के बारे में।
हिंदू धर्म में सूर्य देवता, तुलसी मैय्या और अन्य देवी देवताओं को अर्घ्य दिया जाता है। हिंदू धर्म में अर्घ्य देने को लेकर यह मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
हिंदू धर्म में अर्घ्य देने के नियमों में एक नियम यह भी है कि इसे खड़े होकर ही देना चाहिए। हिंदू धर्म में बैठकर अर्घ्य देने की मनाही है।
ज्योतिष राधाकांत के अनुसार, अर्घ्य देते समय खड़े रहने के पीछे कि वजह यह है कि ऐसा करने से हमारे सातों चक्र जागृत हो जाते है।
शास्त्रों के अनुसार, पूजा के दौरान व्यक्ति को स्थिर होकर एक जगह पर बैठ जाना चाहिए। जबकि अर्घ्य देते समय खड़े रहने से 7 चक्र जागृत हो जाते है और यह चक्र हमें दिव्यता की ओर ले जाते है।
दिव्यता की ओर जाने से शरीर की नकारात्मकता दूर होती है और जातक सकारात्मकता की ओर बढ़ जाते है। बैठकर जल देने की एक वजह है कि वह आपके पैरों में लगेगा।
अगर अर्घ्य आप बैठकर देते है तो पृथ्वी पर जल गिरने के बाद अगर वो आपके पैरों में स्पर्श करगा तो अर्घ्य अपवित्र माना जाएगा। पैरों पर अर्घ्य का स्पर्श अर्घ्य की पवित्रता को खत्म कर देगा।
धार्मिक शास्त्रों में इस बात का वर्णन मिलता है कि अर्घ्य देते समय हाथ मस्तक के ऊपर रहना चाहिए। ऐसे अर्घ्य देने से मानसिक समस्या दूर होगी और तनाव से राहत मिलेगी।