मृत्यु जीवन का एक ऐसा सत्य हैं जिससे इंसान पूरे जीवन भागता रहता है। आइए जानते हैं चाणक्य के मुताबिक मौत के बाद अपने साथ क्या ले जाता हैं इंसान?
इस धरती पर व्यक्ति का जन्म किसी न किसी उद्देश्य से होता है। चाणक्य का भी यही मानना था, उनके मानना था कि भगवान ने जानवर और इंसान में समानता जरूर रखी है परंतु दोनों एक दूसरे से काफी अलग है।
पूरी जीवन व्यक्ति जिम्मेदारियों में निकाल देता है जिसके चलते उसके कुछ काम अधूरे रह जाते है। अपने जीवन को अर्थपूर्ण बनाने के लिए कुछ ऐसे काम अवश्य करने चाहिए जिससे आपका परिवार सुखी रह सकें।
इंसान इस दुनिया में अकेला ही आता है और अकेला ही चला भी जाता है। इंसान को मृत्यु के बाद स्वर्ग और नर्क का रास्ता भी अकेले ही तय करना पड़ता है।
मृत्यु के बाद इंसान के साथ सिर्फ उसके कर्म जाते है। अच्छे कर्मों का अच्छा फल और पाप कर्मों का बुरा फल मिलना नियति का नियम होता है।
अपने जीवन में सब कुछ हासिल करने के चलते व्यक्ति पूरी जिंदगी भागता रहता है परंतु मृत्यु के बाद उसकी इस धरती पर बनाई हर चीज यहीं छूट जाती है और सिर्फ उसके कर्म ही उसके साथ जाते है।
जीवन एक छलावा है और मृत्यु एकमात्र सत्य है। लोग पूरे जीवन इस सच को स्वीकार करने के बजाय कर्म करते रहते है। जिसका उन्हें अच्छा या बुरा फल भी मिलता है।
जीवन में हमेशा अच्छें कर्म ही करने चाहिए क्योंकि मृत्यु के बाद सिर्फ और सिर्फ आपके कर्म के आधार पर ही आपके जीवन का आकलन होता हैं।