सनातन धर्म में छठ का त्योहार दीपावली के बाद सबसे बड़ा त्योहार माना गया है। आइए जानते हैं नहाय-खाय से शुरु हुए इस पर्व पर किन नियमों के पालन से लाभ मिलने वाला है।
17 नवंबर को नहाय खाय की परंपरा की शुरुआत हो चुकी है। अब यह त्योहार 4 दिनों तक मनाया जाने वाला है। हर साल की तरह इस साल भी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर छठ पूजा की जा रही है।
छठ पूजा का त्योहार बिहार में खासकर पूरे हर्षों-उल्लास के साथ मनाया जाता है। छठी मैय्या के लिए महिलाएं 36 घंटे का व्रत रखती हैं।
महिलाएं 36 घंटे का निर्जला व्रत संतान प्राप्ति और संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थय के लिए रखती है। इस व्रत में छठी माता और सूर्य देव की खासतौर पर आराधना की जाती है।
पंचांग के अनुसार, 4 दिन तक मनाया जाने वाले इस पर्व की शुरुआत आज 17 नवंबर से हो गई है। यह पर्व 20 नवंबर तक चलेगा।
आज यानी 17 नवंबर को पहले दिन नहाय खाए की प्रथा से पावन पर्व की शुरुआत हो गई है। 19 नवंबर को डूबते हुए सूर्य और 20 नवंबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ के पर्व का समापन होगा।
नहाय खाय के दौरान शुद्धता का खास ख्याल रखना चाहिए। सभी सदस्यो को सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनने चाहिए। इस व्रत में पवित्र गंगा नदी का स्नान बेहद शुभ माना जाता हैं।
व्रत के दौरान सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। नहाय खाय के दौरान चावल, लौकी की सब्जी, चने की दाल आदि का सेवन करना चाहिए। व्रत रखने वाले सदस्यों को बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए।