हिंदू धर्म में श्मशान व्यक्ति के जीवन की यात्रा का अंतिम गंतव्य होता है। आइए जानते हैं श्मशान से लौटते हुए पीछे क्यों नहीं देखना चाहिए?
दाह संस्कार के पश्चात व्यक्ति का शरीर तो भस्म हो जाता है, लेकिन आत्मा का अस्तित्व नहीं मिटता है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार शव जलने के बाद लौटते हुए पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए।
गीता में लिखा हैं शरीर के जलने के बाद भी आत्मा जीवित रहती है। क्योंकि आत्मा अजर, अमर और अविनाशी है। ये न कभी जल सकती है, न डूब सकती है और न ही कोई शस्त्र उसे मार सकता है।
दाह संस्कार के बाद व्यक्ति की अपने परिवार जनों और सगे-संबंधी से सभी मोह रुपी बंधन टूट जाते है। ऐसे में पीछे मुड़कर नहीं देखने से मरे हुए व्यक्ति को लगता है कि उसका संबंध खत्म हो गया है।
शव का अंतिम संस्कार करके घर लौटते समय पीछे मुड़कर देखने से परिवार के प्रति मरे हुए व्यक्ति का मोह नहीं खत्म हो पाता है।
मृतक की आत्मा का इस संसार से सभी संबंध तोड़ने के लिए 13 दिन का कर्मकांड चलता है। इस दौरान दाह संस्कार के बाद पीछे मुड़कर न देखना सबसे पहला चरण होता है।
दाह संस्कार के बाद पीछे मुड़कर न देखना मृतक व्यक्ति के लिए यह संदेश होता हैं कि इस धरती से अब उसका संबंध खत्म हो चुका है और उसका दूसरे लोक में जाने का समय आ गया है।
मृत्यु के बाद व्यक्ति के साथ सिर्फ उसके कर्म जाते है। ऐसे में जीवित रहते हुए व्यक्ति को धरती पर हमेशा अच्छे कर्म ही करने चाहिए।