धार्मिक पुराणों में गोवर्धन पर्वत को लेकर कई रोचक किस्से मिलते हैं। वृंदावन में स्थित गोवर्धन को भगवान कृष्ण का रूप भी माना जाता है।
भगवान कृष्ण ने द्वापर युग में गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाया था। ब्रजवासियों ने बारिश से बचाने के लिए इस पर्वत का सहारा लिया था।
पुराणों में उल्लेख मिलता है कि त्रेतायुग में लंका पहुचने के लिए भगवान राम के आदेश पर कई जगह से पत्थर मंगाए गए थे। इन पत्थरों की मदद से राम सेतु का निर्माण हुआ था।
कृष्ण से पहले हनुमान जी भी पर्वत उठा चुके हैं। दरअसल, हनुमान हिमालय से गिरिराज पर्वत को उठाकर ला रहे थे, लेकिन उस समय तक राम सेतु का काम पूरा हो चुका था।
धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि भगवान राम की घोषणा के बाद हर कोई वापिस लौट गया था। इस वजह से हनुमान जी पर्वत को वापस रख आए थे।
हनुमान जी से पर्वत ने बताया कि वो भगवान राम के भक्त है और उनके दर्शन करना चाहते हैं। सवाल पूछते हुए पर्वत ने कहा कि उनके दर्शन अब कब हो पाएंगे।
भगवान हनुमान ने पर्वत से खुलासा करते हुए बताया कि द्वापर युग में श्रीराम ही कृष्ण के रूप में आएंगे। उस युग में दर्शन हो पाएंगे।
हनुमान ने पर्वत को यह भी बताया कि भगवान कृष्ण देवता के तौर पर आपको स्थापित करेंगे। इसके बाद से ही उन्हें गिरिराज के नाम से जाना जाता है।