सूर्य से पहले उठ जाना चाहिए। सूर्योदय की लालिमा के दर्शन करने से असंख्य रोग शरीर के पास नहीं आते। रात्रि जल्दी सोना चाहिए।
सुबह खूब पेट भर कर खाना चाहिए, दोपहर को उससे कम खाना चाहिए और शाम को सबसे कम खाना चाहिए। रात्रि का तो कोई भोजन ही नहीं होता।
मिट्टी में पोषकता 100%, कांसे के बर्तन में 97%, पीतल के बर्तन में 93%, एल्युमिनियम के बर्तन और प्रेशर कुकर में 7-13% ही बचते हैं।
भोजन पकाने के बाद उसमें नमक नहीं डालना चाहिए। अलग से डालने से रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) बढ़ जाता है।
48 मिनट के अंदर न खाने के कारण उसकी पोषकता कम होने लगती है। 12 घंंटे के बाद खाने लायक नहीं रहता है
भोजन के पश्चात् स्नान करने से पाचनशक्ति मंद हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है। इसीलिए स्नान करने के बाद ही भोजन करें।
देर रात तक जागने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कमजोर होती है। पाचन भी ठीक से नहीं होता। आंखों के रोग भी होते हैं।
भोजन करने के पश्चात् पान, गुड़ या सौंफ खाने से पाचन प्रक्रिया अच्छी तरह से होती है। इससे अपच नहीं होता है।