मां बनना जीवन का सबसे खूबसूरत अहसास है। इसमें हर मां की कितने सपने, कितनी उम्मीदें जुड़ी होती है। बच्चे के आने के पहले ही सब चीज तैयार होने लगती हैं।
जब बच्चा गर्भ में होता है तो कोई औरत उसी समय मां बन जाती है। वह बच्चे के ग्रोथ के अनुसार ही खाना-पीना शुरू कर देती है, ताकि बाद में बच्चे को कोई दिक्कत ना हो।
मां बनने के बाद बच्चे को प्यार के साथ-साथ स्किन टच की भी जरूरत होती है। बच्चे को प्यार से सीने से लगाएं, माथे पर हल्का टच करें और धीरे-धीरे सहलाएं।
मां को अपने नवजात बच्चे से बात करनी चाहिए। यह सुनने में अटपटा लग सकता है, लेकिन यह बच्चे के मस्तिष्क के विकास के लिए जरूरी होता है।
नवजात शिशु के डायपर को चेक करते रहना चाहिए। क्योंकि गंदे डायपर में लंबे समय तक रहने से इंफेक्शन और एलर्जी के चांसेज बढ़ जाते हैं।
अगर आप बच्चे को बोतल से दूध पिलाती हैं तो नियमित तौर पर बोतल और निप्पल की सफाई करें। गंदे बोतल से दूध पिलाने का मतलब बीमारी को बुलावा देना है।
नवजात शिशु की स्किन बहुत ही नाजुक और सेंसिटिव होती है। जन्म के लगभग तीन हफ्ते तक शिशु को स्पंज बाथ ही दें, उसे नहलाना नहीं चाहिए।