चापाकल, कुएं जैसे प्राकृतिक स्रोत का ही जल पीने की आदत डालें। बोतलबंद (फ्रिज) बासी पानी अनेक रोगों का जनक है।
सेंधा नमक के बाद काला नमक का स्थान आता है। सफेद नमक जहर के समान होता है।
जलने पर आलू का रस, हल्दी, शहद, घृतकुमारी में कुछ भी लगाने पर जलन ठीक होने के साथ फफोले नहीं पड़ते हैं।
सरसों, तिल, मूंगफली, सुरजमुखी या नारियल का तेल और देशी घी ही खाना चाहिए। रिफाइंड तेल और वनस्पति (डालडा) जहर के समान होता है।
पैर के अंगूठे के नाखूनों को सरसों तेल से भिगोने पर आंखों की खुजली, लाली और जलन ठीक हो जाती है।
चोट, सूजन, दर्द, घाव, फोड़ा होने पर उसके ऊपर पांच से 20 मिनट तक चुंबक रखने से घाव जल्दी ठीक होता है।
14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों व किशोरों को मैदा (बिस्कुट, ब्रेड , समोसा आदि) कभी भी नहीं खिलाना चाहिए।
हृदयरोग के लिए अर्जुन की छाल, लौकी का रस, तुलसी, पुदीना, मौसमी, सेंधा नमक, गुड़, चोकरयुक्त आटा, छिलकेयुक्त अनाज औषधियां हैं।