प्रेग्नेंसी में अकसर महिलाएं बार-बार पेशाब आने से परेशान रहती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रेग्नेंसी बढ़ने के साथ उनके ब्लैडर पर प्रेशर पड़ता है। इसके अलावा कुछ महिलाओं के शरीर में सूजन की दिक्कत आती है और यह वॉटर रिटेंशन की वजह से होता है।
डॉक्टरों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी होता है। उन्हें एक ही बार में ज्यादा पानी पीने से बचना चाहिए। प्यास लगने पर ही पानी न पिएं, बल्कि पूरे दिन में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी लेते रहें।
हालांकि ज्यादा लिक्विड लेने से उनका ब्लैडर फिर पानी से भर जाता है और रात में पेशाब करने की फ्रीक्वेंसी बढ़ जाती है। इसकी वजह से उनकी नींद खराब हो सकती है।
इससे बचने के लिए सोने से कम से कम एक घंटे पहले एक छोटा गिलास पानी पर्याप्त है, जब तक कि महिला को बहुत प्यास न लगे।
डॉक्टर कहते हैं कि शरीर को दिन में 8 से 10 गिलास की जरूरत होती है, ऐसे में ज्यादा पानी दिन के समय पीना चाहिए, लेकिन यह मात्रा मौसम, व्यायाम और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार बढ़ सकती है।
शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से पाचन में मदद मिलती है, एमनियोटिक द्रव बना रहता है, और निर्जलीकरण से बचा जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त मात्रा में हाइडेटेड रहना बेहद जरूरी है। क्योंकि पानी मनियोटिक द्रव बनाए रखने में मदद कर सकता है।
इसी के जरिए शिशु तक पोषक तत्व और ऑक्सीजन पहुंचता है, जो उसके शरीर के लिए बेहद जरूरी है। इसके अलावा जब आप प्रेग्नेंसी में पर्याप्त मात्रा में पानी पीते हैं तो मूत्र मार्ग में संक्रमण रुकता है और शरीर के तापमान को कंट्रोल रखने में मदद मिलती है।
पर्याप्त पानी पीने से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने, ऊतक निर्माण में सहायता मिलती है और सिरदर्द, सूजन और थकान जैसी गर्भावस्था की सामान्य असुविधाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।