वास्तु शास्त्र में दिशा को महत्वपूर्ण माना गया है। दिशाओं के शुभ और अशुभ प्रभाव पर ही हमारे काम निर्भर होते हैं और व्यक्ति अपने फैसले लेता है। आइए जानते हैं कि दिशा शूल कैसे देखना चाहिए-
दिशा शूल एक ऐसा योग है, जो उस संबंधित दिशा में यात्रा करने पर बाधा आना या काम बिगड़ने के बारे में बताता है। जिस दिशा में यात्रा के लिए जा रहे हैं या उस दिशा में शूल है, तो यात्रा में बाधा आ सकती है।
सोमवार और शनिवार को पूर्व दिशा में शूल माना जाता है। इन दोनों दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। अगर बहुत जरुरी काम है, तो सोमवार को दर्पण देखकर यात्रा पर जाएं और शनिवार के दिन उड़द की दाल या अदरक खाकर यात्रा पर जाएं।
मंगलवार और बुधवार को उत्तर दिशा में शूल होता है। इन दोनों दिशा में काम से यात्रा करने से बचना चाहिए। इससे काम में बाधा आ सकती है। अगर जरूरी कार्य है, तो मंगलवार को गुड़ खाकर निकले। वहीं बुधवार को तिल और धनिया खाकर निकलें।
गुरुवार को दक्षिण दिशा में शूल माना जाता है। इस दिन दक्षिण दिशा में जाना कष्टकारी होता है। अगर जाना जरूरी है, तो दही खाकर घर से बाहर निकलें।
शुक्रवार और रविवार को पश्चिम दिशा में शूल माना जाता है। इस दिशा में यात्रा करने से कार्य में सफलता नहीं मिलती। अगर जरुरी काम है, तो दलिया या गुड़ खाकर निकलें।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी विशेष कार्य पर जाने से पहले दिशा का विचार अवश्य किया जाता है। अगर किसी प्रकार के जरुरी काम पर जा रहे हैं, तो एक दिन पहले मंदिर में अक्षत जरूर रख दें।
ऐसे दिशाओं के अनुसार दिशा शूल देख सकते हैं। एस्ट्रो से जुड़ी ऐसी ही अन्य खबरों के लिए पढ़ते रहें NAIDUNIA.COM