पूजा की शुरुआत से पहले आसन पर बैठें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पूजा पर बैठने के लिए अपने ही आसान का इस्तेमाल करना चाहिए।
इसी प्रकार मंत्र जाप के लिए माला भी हर व्यक्ति का अलग-अलग होना चाहिए।
एक मुखी दीपक प्रज्वल्लित करना चाहिए। दीपक या तो देसी घी या तिल के तेल का प्रज्वल्लित कर सकते हैं।
सर्वप्रथम ईश्वर से प्रार्थना करें कि मन, कर्म, वचन से आपकी पूजा करना चाहता हूं ताकि कृपा प्राप्त कर सकूं।
सामान्य रूप से सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है। लेकिन अगर आपके कोई गुरू हैं तो पहले उनका स्मरण करें।
मंत्र जाप के बाद जल का स्पर्श न करें अन्यथा सकारात्मक ऊर्जा जल में चली जाती है।
अगर आरती करना चाहते हैं तो सबसे अंत में करें। आरती का मतलब पूजा का समापन होता है।
एक बात ध्यान रखें की दैनिक जीवन की पूजा उपासना में भगवान विष्णु की आरती करनी चाहिए।