लसोड़ा को कुछ लोग इसे गोंदी और निसोरा के नाम से भी जानते हैं। लसोड़ा में प्रोटीन, क्रूड फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, वसा, फाइबर, आयरन, फॉस्फोरस व कैल्शियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।
लसोड़े के फल में लिवर को ठीक करने वाली कई गतिविधियां होती हैं। तेल, ग्लाइकोसाइड्स, फ्लेवोनोइड्स, स्टेरोल्स, सैपोनिन्स, टेरपीनोइड्स, एल्कलॉइड्स, गम्स के होने से लिवर हीलिंग गुण हो सकते हैं।
एक अध्ययन से पता चला है कि कॉर्डिया मायक्सा फल में उच्च-रक्तचापरोधी गुण होते हैं। यह फल रक्तचाप के स्तर को प्रबंधित कर सकता है और ऑक्सीडेटिव तनाव को कम कर सकता है।
मानसून में स्किन पर फोड़े-फुंसी होना आम बात है। ऐसे में अगर आपके पास लसोड़े का पेड़ है तो उसके पत्ते को पीसकर प्रभावित त्वचा पर लगाएंगे तो आराम मिलेगा।
अगर गला खराब है तो आप ठीक करने के लिए लसोड़े की छाल को पानी में उबालें और फिर छानकर पिएं। स्वाद के लिए आप इसमें काली मिर्च और शहद भी मिला सकते हैं।
लसड़ो से मसूड़ों के दर्द व मुंह के छालों को दूर किया जा सकता है। लसोड़े की छाल के पाउडर को पानी के साथ उबालें और फिर इस ड्रिंक को पीएं। मुंह की बीमारियों में फायदा मिलता है।
ग्लूबेरी यानी लसोड़ा का नियमित सेवन गठिया से पीड़ित लोगों में जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने के लिए जाना जाता है। लसोड़ा में एनाल्जेसिक गुण होते हैं जो जोड़ों के दर्द से राहत दिला सकते हैं।
उम्र से पहले ही बाल सफेद हो रहे हैं तो लसोड़ा फलों से निकले रस को बालों पर लगाने से सफेद की समस्या दूर हो जाती है। आप लसोड़े के फल के रस को तेल में मिलाकर भी प्रयोग में ले सकते हैं।