जबलपुर स्टेशन से 16 किमी दूर शांत वातावरण, हरियाली के भरी पहाड़ी का मनमोहक द्श्य राेमांचित करता है ।
जबलपुर से करीब 15 किमी दूर भेड़ाघाट रोड पर स्थित प्राचीन ऐतिहासिक मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर एक धार्मिक व दर्शनीय स्थल है।
महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती की संयुक्त रूपों वाली मां त्रिपुर सुंदरी विश्व की दुर्लभ और एक मात्र प्रतिमा हैं।
शांत मुद्रा में लेटे हुए विराजमान मां त्रिपुर सुंदरी, महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती का दस महाविद्याओं में तीसरा स्थान है।
राजराजेश्वरी, ललिता और महामाया के मनमोहक दर्शन एक साथ मिलते हैं। माता का नयनाभिराम शृंगार अद्भुत है।
कलचुरि राजवंश के पराक्रमी राजा कर्णदेव ने 11वीं शताब्दी में मंदिर का निर्माण कराया था।
प्रवेश द्वार से मंदिर के पिछले हिस्से में मनौती वाले नारियल बांधे जाते हैं, जो देखते ही बनते हैं।
ये प्रतिमाएं खुदाई से प्राप्त हुई हैं जिन्हें सहेज कर रखा गया है। यहां लोग पूजन अर्चन करते हैं।
त्रिपुर सुंदरी को सदैव यौवन अवस्था में रहने का आशीर्वाद प्राप्त है। 16 कलाओं की प्रतिमूर्ति देवी त्रिपुर सुंदरी ही हैं।
ऊंचाई पर बने मंदिर के चारों तरफ हरयाली है। पत्थर, खाईनुमा पथरीले रास्ते, कंदराएं, विशाल वृक्ष पर्यटन प्रेमियों में राेमांच पैदा कर सकते हैं।