हिंदू धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व बताया गया है। हर साल चातुर्मास आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी से प्रारंभ होता है और कार्तिक मास की एकादशी तक रहता है।
पौराणिक मान्यता है कि चातुर्मास में देवता योग निद्रा में चले जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार इन 4 महीनों में व्यक्ति को नियमों का पालन करते हुए संयमित जीवन जीना चाहिए।
चातुर्मास में नियमों का विधि विधान से पालन करने पर भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है और उसे धन धान्य की प्राप्ति होती है।
चातुर्मास के दौरान 4 महीनों में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। पत्तल पर भोजन करने, उपवास करने और मौन, जप, ध्यान करने से दान, पुण्य की प्राप्ति होती है।
चातुर्मास में पान, गुड़ आदि का त्याग कर देना चाहिए। इसके अलावा दही, नमक का सेवन करने से भी बचना चाहिए।
चातुर्मास में काले और नीले वस्त्र धारण करने से बचना चाहिए। ऐसा करने से मन में भक्ति भाव का संचार होता है और ईश्वर के प्रति आस्था और बढ़ती है।