आयुर्वेद में शहद को काफी गुणकारी बताया गया है। कई औषधीय गुणों के साथ-साथ इसमें ग्लूकोज तथा फ्रुक्टोज पर्याप्त मात्रा में होता है।
हिमालय का कार्तिक मधु औषधि गुणों से भरपूर है। इस ऋतु का शहद जमने पर सफेद, दानेदार तथा सुगंधित होता है। इसको खाने से गले में हलकी मिर्च जैसा स्वाद लगता है।
फाल्गुन और चैत्र माह में तैयार होने वाला शहद सरसों के फूलों के समान होता है। यह सर्दी जुकाम जैसी बीमारियों में काफी ज्यादा फायदेमंद होता है।
वैशाख और ज्येष्ठ मास का शहद लाल रंग का होता है, जो कम जमता है। यह सुगंधित होता है। इसकी तासीर काफी ज्यादा गर्म होती है।
आषाढ़ माह का शहद भी ज्यादातर लाल रंग का होता है। यह स्वाद में थोड़ा कड़वा लगता है। यह शरीर में गर्मी दिखाता है। ज्यादा सेवन से पेचिश की समस्या हो सकती है।
शहद को यदि सुबह शाम गर्म पानी के साथ सेवन किया जाए तो शरीर की चर्बी तेजी से कम होती है। मोटापे की समस्या से छुटकारा मिलता है।
आंखों में एक बूंद शहद यदि रोज डालते हैं तो आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके अलावा यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मददगार होता है।