महाभारत के भीषण युद्ध में हर तरफ तबाही मची थी। आइए जानते है 4 पांडवों को युद्धभूमि में अकेले रोकने वाला राजा जयद्रथ कौन थे?
राजा जयद्रथ सिंधु प्रदेश के राजा थे। जयद्रथ के पिता का नाम वृद्धक्षत्र था। महाभारत के युद्ध में प्रवेश करते ही जयद्रथ ने तबाही मचा दी थी।
राजा जयद्रथ का विवाह कौरवों की इकलौती बहन दु: शला से हुआ था। ऐसे में वह हस्तिनापुर के राजा धृतराष्ट्र के दामाद भी थे।
सिंधु नरेश वृद्धक्षत्र के यहां जयद्रथ का जन्म काफी इंतजार के बाद हुआ था। जयद्रथ को यह वरदान था कि उनका वध कोई आम इंसान नहीं कर पाएगा।
राजा जयद्रथ महाभारत के युद्ध में कौरवों की तरफ से लड़े थे। कड़ी तपस्या से उन्हें यह वरदान प्राप्त हुआ था कि उन्हें सिर्फ अर्जुन ही पराजित कर सकता है।
युद्ध के तेरहवें दिन जब अर्जुन राजा भगदत्त से युद्ध करने हेतु महाभारत के रण में प्रवेश नहीं कर पाते, तो गुरु द्रोण के बनाए चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए चारों पांडव और अभिमन्यु राजा जयद्रथ से युद्ध करते है।
चक्रव्यूह में अकेले अर्जुन पुत्र अभिमन्यु ही प्रवेश कर पाते है। बाकी चार पांडवों को जयद्रथ अकेले ही चक्रव्यूह के मार्ग पर रोक लेते है। भीषण युद्ध में जयद्रथ अकेले ही चारों पांडवों पर भारी पड़ते है और सभी को हरा देते है।
अभिमन्यु का चक्रव्यूह में प्रवेश करना कौरवों की रणनीति का हिस्सा रहता है। इस चक्रव्यूह में प्रवेश के बाद अभिमन्यु कौरवों के हाथों छल से मारा जाता है। इसका बदला लेने के लिए अर्जुन जयद्रथ की मृत्यु का प्रण लेते है।