समुद्र मंथन के दौरान समुद्र से 14 रत्नों की प्राप्ति होती है। आइए जानते है समुद्र मंथन से निकलने वाले 14 रत्नों के नाम?
समुद्र मंथन होने के बाद इसमें से सबसे पहले कालकूट विष निकला था। इसके निकलने से सृष्टि में हाहाकार मच गया था। शिव जी ने इस विष को पिया था। वहीं कामधेनु एक दिव्य गाय थी, जिसे ब्रह्मऋषियों ने ग्रहण किया था।
उच्चै:श्रवा को घोड़े का राजा कहा जाता है। वहीं ऐरावत एक हाथ थी, जिसे इंद्रदेव ने अपना वाहन बनाया था। यह दोनों ही समुद्र मंथन से प्राप्त हुए थे।
समुद्र मंथन के दौरान कौस्तुभ मणि भगवान श्रीहरि को मिली और कल्पवृक्ष एक इच्छापूर्ति वाला वृक्ष वाला दिव्य वृक्ष था।
रंभा एक अप्सरा थी, जिसे ब्रह्मांड में सबसे सुंदर नारी माना गया है। वहीं देवी लक्ष्मी क्षीर सागर से प्रकट होकर, उन्होंने भगवान विष्णु का वरण किया।
समुद्र मंथन से मदिरा भी प्राप्त हुई थी, वारुणी यानी मदिरा को दैत्यों ने ग्रहण किया था। चंद्रमा भी समुद्र मंथन से निकला था।
पारिजात का पुष्प एक वृक्ष था, पांचजन्य शंख- विजय का प्रतीक जो भगवान विष्णु को मिली। धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अंशावतार माना गया। यह अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।
समुद्र मंथन से अमृत की उत्पत्ति भी हुई थी। इसे लेकर देव और दानवों में झगड़ा भी हो गया था। अंत में भगवान विष्णु ने देवताओं को अमृत पिलाकर अमर बना दिया था।