शनिवार का दिन न्याय के देवता भगवान शनि देव को समर्पित है। शनिदेव को कर्मफल दाता के नाम से भी जाना जाता है जो कर्मों के अनुसार फल देते हैं।
यदि जातकों की कुंडली में शनि की दशा शुभ हो तो वह व्यक्ति खुब तरक्की करता है। वहीं, शनि पीड़ित हों तो दुखों का पहाड़ भी टूटने लगता है।
ऐसे में हरेक व्यक्ति के मन में यह होता है कि उनके ऊपर शनि देव की कृपा बनी रहे। शनि को प्रसन्न करने के लिए शनिवार का व्रत काफी शुभ माना गया है।
शनि देव का यह व्रत करने से सारे दुख, संकट, पीड़ा दूर हो जाते हैं। घरों के अंदर सुख शांति और समृद्धि आती है। आइए इसकी कथा और पूजन विधि के बारे में जानते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि व्रत करने से व्यक्ति अपनी कुंडली में पीड़ित शनि ग्रह को मजबूत कर सकता है। जिसके ऊपर शनिदेव की कृपा होती है उसे सफल होने से कोई नहीं रोकता है।
एक समय की बात है एक राजा के ऊपर बनाई गई है जो अपने कर्मों के हिसाब से चीजों को पाता है। इससे उसके कई दुख दूर होते हैं।
इस दिन सुबह उठकर स्नान करें और उसके बाद स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद पीपल वृक्ष के पास जाकर जल अर्पित करें।
सुबह लोहे से निर्मित शनिदेव की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद मूर्ति को चावलों से बनाए गए चौबीस दल के कमल पर स्थापित करें।