तुलसी का सनातन धर्म में काफी ज्यादा महत्व होता है। धार्मिक अनुष्ठानों में भी तुलसी के पत्तों को प्रसाद के पास रखा जाता है। आइए जानते है ब्रह्ममुहूर्त में तुलसी के पत्ते तोड़ने चाहिए या नहीं?
तुलसी के पत्तें को बेहद पवित्र माना जाता है। इसके पौधे की पूजा का भी हिंदू धर्म में खास महत्व होता है। तुलसी क् पत्तों की पवित्रता के चलते ही उसे प्रसाद के साथ रखा जाता है।
ब्रह्म मुहूर्त में तुलसी के पत्तों को तोड़ने को लेकर लोगों के मन शंका रहती है। आज हम आपकी इस शंका को दूर करने की कोशिश करेंगे।
ब्रह्ममुहूर्त में तुलसी के पौधे से पत्तियों को तोड़ना बेहद शुभ माना जाता है। लेकिन, इसे तोड़ने के लिए कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है।
ब्रह्ममुहूर्त में देवी-देवता उठे होते है। इस समय भगवान का ध्यान करने से वह जल्दी प्रसन्न होते है। सुबह के समय ब्रह्ममुहूर्त में तुलसी के पत्तें तोड़ने समय 'ॐ-ॐ' मंत्र का 11 बार जाप करें।
मंत्र की सफलता के लिए इस मंत्र का 21 बार जाप करना चाहिए। ॐ सुभद्राय नम:, मातस्तुलसि गोविन्द हृदयानन्द कारिणी,नारायणस्य पूजार्थं चिनोमि त्वां नमोस्तुते।
महाप्रसादजननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।। इस मंत्र का जाप अवश्य करें। तुलसी के पौधे पर जल चढ़ाने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
आर्थिक परेशानियों से निजात पाने के लिए तुलसी के पत्तों पर सिंदूर लगाना शुभ माना जाता है। तुलसी पर जल चढ़ाते समय सिंदूर मिलाने से श्रीहरि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।