शिव जी की प्रतिमा को जब हम निहारते है तो उनके साथ दिखने वाली कई चीजों के बारे में हमे पता नहीं होता है। आइए जानते हैं शिव जी के गले में विराजमान नाग से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में।
शिव जी के गले में जो नाग विराजमान है उनका नाम वासुकि है। वासुकि भगवान शिव के परम भक्त थे, जिनकी भक्ति से खुश होकर शिव जी ने उन्हें अपने पास स्थान दिया था।
ऐसी मान्यता है कि नाग जाति के लोगों ने ही सबसे पहले शिवलिंग की पूजा करने की शुरुआत की थी। वासुकी ने सच्चे मन से भोले बाबा की तपस्या की थी।
धार्मिक शास्त्रों में वासुकी को नागलोक का राजा माना गया है। नागलोक के राजा वासुकी महर्षि कश्यप के पुत्र थे।
समुद्र मंथन के दौरान वासुकी को रस्सी के रुप में मेरू पर्वत के चारों ओर लपेटकर मंथन किया गया था। इस मंथन के बाद उनका पूरा शरीरी खूल से लथपथ हो गया था।
वासुकी ने भगवान कृष्ण की जोरदार बारिश से रक्षा की थी। जब वासुदेव चुपचाप श्री कृष्ण को कंस की जेल से गोकुल ले जा रहे थे उसी वक्त तेज बारिश हो रही थी।
धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक भगवान शिव को आदि का गुरु माना जाता है। शिव जी ने सर्प को अपने गले में लपेटकर यह संदेश दिया हैं कि अगर गलत व्यक्ति भी सही काम करें तो उसे स्वीकार कर लेना चाहिए।
नागों से शिव जी को बेहद लगाव था। इस बाता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता हैं कि गुजरात के द्वारा में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भी स्थित हैं।