शरीर में हड्डियों का मजबूत होना बेहद जरूरी होता है। अगर शरीर में हड्डियां मजबूत न होत रोजमर्रा की एक्टिविटी करने में भी परेशानियां आती है। आइए जानते है बोन कैंसर के को टेस्ट से कैसे पहचानें।
शरीर में किसी भी प्रकार की बीमारी या कमी महसूस होने पर टेस्ट और चेकअप कराना चाहिए। कई बार मशीन के स्कैन में ही बीमारियों का पता चल पाता है।
सारकोमा कैंसर शरीर की हड्डियों या कोमल टिशू से शुरू होता है। ये बीमारी वैश्विक स्तर पर और भारत में दुर्लभ है। सारकोमा में लक्षणों के प्रस्तुति की कमी इस बीमारी को और खतरनाक बना सकती है।
हड्डियों के कैंसर का पता लगाने के लिए एक्स रे, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसे मेडिकल टेस्ट कराना चाहिए। इन टेस्ट में बीमारी का पता लग सकता है।
अगर समस्या गंभीर है और इन टेस्ट में सामने नहीं आ रही है तो डॉक्टर आपको बायोप्सी कराने की सलाह भी दे सकता है। डॉक्टर की सलाह पर ही कोई कदम उठाए।
हड्डियों का कैंसर होने पर कीमोथेरेपी का इलाज किया जाता है। ये दवाएं कैंसर की कोशिकाओं को जल्द नष्ट करने का काम करती है। इसका थेरेपी का इस्तेमाल कई अन्य बीमारियों में भी किया जाता है।
इस थेरेपी में मशीन की मदद से कैंसर से प्रभावित शरीर के अंग को हाई रेडिएशन से खत्म किया जाता हैं। हालांकि, रेडियोथेरेपी से हेल्दी सेल्स के खत्म होने का खतरा भी रहता है।
हड्डियों के कैंसर के लक्षण में हड्डियों में सूजन, गांठ पड़ना, बार-बार सुन्न महसूस होना, जल्द हाथ-पैर में जकड़न महसूस होना, हड्डियों का बार-बार फ्रैक्चर होना शामिल है। शरीर में अनियमितता महसूस होने पर डॉक्टर से परामर्श करें।