लोग स्किन के साफ और डार्क सर्कल को छुपाने के लिए ब्लीच का इस्तेमाल करते हैं। इसस स्किन खूबसूरत और साफ नजर आती है। अधिक ब्लीच करने से त्वचा संबंधी परेशानी हो सकती है।
ब्लीच मे कॉर्टिकोस्टेरॉइड होता है जो मुहांसों की वजह बन सकता है। अधिक इस्तेमाल से माथे, गाल के अलावा चेस्ट, पीठ और बाकी बॉडी के हिस्सों में भी मुंहासों की समस्या हो सकती है।
कई बार ऐसा होता है कि आप ब्लीच करवाते हैं तो आपकी स्किन सुंदर की जगह बेकार नजर आने लगती है। इसका मतलब यह कि आपकी स्किन को ब्लीच से एलर्जी है। ऐसे में स्किन लगाने से बचना चाहिए।
स्किन ब्लीचिंग प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से कॉन्टैक्ट डर्मटाइटिस हो सकता है। इसमें स्किन का लाल होना, फफोले, स्किन अल्सर, ड्राई स्किन, सूजन, खुजली, जलन आदि की समस्या हो सकती है।
कई बार ब्लीचिंग कराने से कुछ लोगों में नेफ्रोटिक सिंड्रोम की समस्या हो जाती है। यह एक प्रकार का किडनी से संबंधित डिसऑर्डर है। इसके कारण किडनी की ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंच सकता है।
बार-बार सप्ताह या महीने में दो-तीन बार ब्लीचिंग कराते हैं तो ब्लीच में मौजूद केमिकल से स्किन पर रैशेज, लाल चकत्ते, दाने, फ्लेकी स्किन की समस्या, छाले आदि हो सकते हैं।
-ब्लीचिंग कराने से त्वचा पर खुजली और जलन की समस्या इतनी बढ़ जाती है कि वे जल्दी ठीक नहीं होता है। ऐसे में स्किन स्पेशलिस्ट के पास जरूर जाकर दिखा लें।
अगर आप ब्लीच से होने वाले नुकसान से बचा चाहते हैं तो ब्लीच का सही इस्तेमाल करें। इसलिए ब्लीच के उपयोग में कम से कम एक महीने का अंतर जरूर रखें। अगर जरूरत न हो तो ब्लीच न करें।