वास्तु एक ऐसी भारतीय प्रथा हैं जो मनुष्यों और उनके बीच तालमेल बैठाने का प्रयास करता हैं। आइए जानते हैं क्लीनिक बनवाते समय आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
क्लीनिक एक ऐसा सुविधा केंद्र होता हैं जहां शारीरिक रूप से बीमार व्यक्ति अपना इलाज करवाने जाता हैं। आज के समय में डॉक्टरों का क्लीनिक खोलना आम बात हो गई हैं।
क्लीनिक में लगातार नल से पानी बहते रहने से वास्तु दोष होता हैं। इसलिए क्लीनिक में नल को खुला न छोड़े और अगर खराब हो तो जल्द से जल्द उन्हें बनवाएं।
सीढ़ियों के नीचे बची जगह में टॉयलेट, स्टोर या किचन नहीं बनवाना चाहिए। ऐसा करने से दिल की बीमार और घबराहट भी हो सकती हैं।
क्लीनिक के उत्तर-पूर्वी कोने में शौचालय या सीढ़ियां बनवाने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में उत्तर-पूर्वी कोने में आपको क्लीनिक बनवाने से बचना चाहिए।
अगर आप अपने क्लीनिक में चिकित्सा संबंधी उपकरणों को रखना चाहते है तो दिशा का खास ख्याल रखना चाहिए। दक्षिण-पूर्व दिशा में मशीनों को रखना सर्वोत्तम माना जाता है।
क्लीनिक में अगर सीढ़ियां हो तो उन्हें विषम संख्या में रखना चाहिए। सीढ़ियों का निर्माण हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं करवाना चाहिए।
अगर आप चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग आपकी क्लीनिक पर अपनी समस्याएं लेकर आएं तो उसके लिए आपको उन्हें अच्छी सुविधाएं देनी होंगी।