शरद पूर्णिमा पर इस साल में सुख-समृद्धि की देवी महलक्ष्मी के उपस्थिति दिवस पर 28 अक्टूबर शनिवार को साल अंतिम चंद्रग्रहण लगने वाला हैं। आइए जानते है इस पर्व पर खीर का भोग लगाएं या नहीं।
चंद्रग्रहण के चलते व्रत-पूजन और दर्शन को लेकर काफी संशय पनपा हुआ हैं। इस दौरान सोलह कलाओं से परिपूर्ण चंद्रमा के आरोग्य दायिनी किरण के सामने खीर रखने को लेकर संशय बना हुआ हैं।
लोगों में इस बात को लेकर काफी असमंजस हैं कि खीर को चंद्रमा के नीचे रखें या न रखें। आराध्य को खीर अर्पित करने से पहले क्या करना सही होगा या नहीं।
चंद्रोदय का समय 5 बजकर 20 बजे लगेगा। 2023 में पूर्णिमा तिथि 28 अक्टूबर को सुबह 4 बजकर 17 मिनट से रात 1 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।
ग्रहण काल रात 1 बजकर 5 मिनट से 2 बजकर 22 तक 1 घंटा 17 मिनट तक रहेगा। इस दौरान प्रारंभ रात 1.05 बजें, मध्यकाल रात 1 बजकर 44 मिनट पर और मोक्षकाल रात 2 बजकर 22 मिनट तक रहेगा।
खीर का भोग सूतक काल से पहले भगवान को लगाए और उसको ग्रहण करें। खीर में तुलसी का पत्ता डालें और इसमें आप मोरधन और साबूदाने का उपयोग भी कर सकते हैं।
ग्रहण भारत समेत ऑस्ट्रेलिया, संपूर्ण एशिया, यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण पूर्वी अमेरिका, उत्तरी अमेरिका में भी दिखाई देगा। ग्रहण काल में मूर्ति को स्पर्श करना भी निषेध माना गया हैं।
सूतक काल के दौरान आप मूर्ति पूजन नहीं कर सकते। हालांकि हनुमान चालीसा, शिव चालीसा और अन्य पाठ भी कर सकते हैं।