गुरु मंत्र आदमी अक्सर अपने जीवन के उस पड़ाव पर आ कर लेता हैं। आइए जानते हैं कि गुरु मंत्र क्या हैं और इसे कब लिया जाता हैं।
मंत्र शब्द का अर्थ मन और मनन से हैं जबकि त्र का अर्थ रक्षा और शक्ति से है। मंत्र लेने से व्यक्ति इष्ट को प्राप्त कर सकते हैं और अनिष्ट बाधाओं का भी नाश होता हैं।
गुरुमंत्र का मतलब सिर्फ अक्षर ही नहीं, अपितु चैतन्य, ज्ञान और आशीर्वाद की प्राप्ति होती हैं। गुरुमंत्र लेने से आपकी व्यक्ति की तेजी से प्रगति होती हैं।
गुरुमंत्र लेने से शिष्य अपने आध्यात्मिक प्रगति के मार्ग पर उन्नति करता हैं। मंत्रजप और नामजप दोनों ही किसी शब्द, अक्षर, मंत्र अथवा वाक्य को बार बार जपा जाता हैं।
किसी भी मंत्र की शक्ति उसके बीज में होती हैं। मंत्र का जप तभी प्रभावशाली होता हैं जब योग्य बीज को चुना जाएं। यह मंत्र के देवता की शक्ति को जागृत करता हैं।
ॐ शब्द हर मंत्रों का राजा होता हैं। ॐ शब्द को कई मंत्रों के पहले लगाया जाता हैं, यह परब्रह्म का परिचायक है। ईश्वर के निर्गुण तत्त्व से ही पूरे सगुण ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई हैं।
व्यक्ति के जीवन की सर्वोच्च आध्यात्मिक अनुभूति होती हैं मोक्ष की प्राप्ति करना। मोक्ष प्राप्ति होने पर व्यक्ति को ईश्वर के साथ एकरूप हो जाने और आनंद का अनुभव होता हैं।
गुरुमंत्र लेने वाला व्यक्ति अगर अपनी साधना के प्रति जागरूक हो तो अप्रकट गुरुतत्व उसके जीवन में उसके प्रगति के लिए उचित मौकों का निर्माण करता हैं।
पैसे देकर लिया हुआ गुरु मंत्र नाम का गुरु मंत्र होता हैं। अगर कोई व्यक्ति सही मायनों में गुरु मंत्र देते हैं तो उसे सत्सेवा, त्याग तथा सभी से निरपेक्ष प्रेम करना चाहिए ।