हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर वर्ष खरमास और मलमास होता है, लेकिन इन दोनों को कभी लोग एक सा ही समझते है।
आज हम आपको खरमास और मलमास के बीच के अंतर को विस्तार से समझने की कोशिश करेंगे कि खरमास और मलमास में क्या अंतर होता है।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सूर्य जिस समय गुरु ग्रह बृहस्पति की राशि धनु या मीन में गोचर करती है, तो उस अवधि को खरमास कहा जाता है।
इस वर्ष का खरमास 16 दिसंबर से शुरू हुआ है, जो 14 जनवरी तक चलेगा। मकर संक्रांति के शुरू होते खरमास समाप्त हो जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास के दौरान मुंडन, जनेऊ संस्कार या फिर किसी भी तरह का मंगल कार्य नहीं किया जाता है।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर वर्ष मलमास भी आता है। बता दें कि मलमास भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित होता है। मलमास को अधिकमास भी कहा जाता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मलमास के दौरान गृह प्रवेश, विवाह, शुभ कार्य, धार्मिक कार्यक्रम करना वर्जित होता है।