हिंदू धर्म में इस यात्रा का अत्यधिक महत्व है। यह यात्रा प्रतिवर्ष आषाढ़ महीने में आयोजित की जाती है, जिसमें देशभर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
यह यात्रा आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरु होती है। इस हिसाब से इस साल इस यात्रा की शुरुआत 7 जुलाई से हो रही है।
इस यात्रा को रथ महोत्सव और गुंडिचा यात्रा के नाम से भी जानते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस यात्रा में शामिल होने से भक्तों के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि आती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार सुभद्रा ने भगवान जगन्नाथ से नगर देखने की इच्छा प्रकट की। तब भगवान ने उन्हें रथ में बिठाकर नगर भ्रमण कराया।
इस यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ और सुभद्रा अपनी मौसी के घर भी गए और वहां 7 दिनों तक रुके। तभी से इस यात्रा की शुरुआत मानी जाती है।
इस यात्रा में 3 रथ होते हैं, जिसमें सबसे आगे बलराम जी का रथ होता है। बीच में सुभद्रा जी का रथ और सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ का रथ होता है।
इन रथों को बनाने के लिए नीम की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है और इसमें लोहे का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है।
इस यात्रा के रथ आषाढ़ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को वापस लौटते हैं, जिसे बहुदा यात्रा के नाम से जाना जाता है।
जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने से व्यक्ति के जीवन के सभी पाप दूर होते हैं। धर्म और आध्यात्म से जुड़ी ऐसी ही अन्य खबरों के लिए पढ़ते रहें Naidunia.Com