हिंदू धर्म में लोग अपने पूर्वजों की आत्माओं की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करते हैं। यह भाद्रपद माह की पूर्णिमा से शुरू होता है और आश्वयुज माह की अमावस्या तक चलता है। आइए जानते हैं कि पितृपक्ष में क्या परहेज करना चाहिए-
पितृपक्ष के दौरान खीरा, करेला, सरसों का साग,मूली, सूरन और जमीन के नीचे उगने वाली सब्जियों को खाने से बचना चाहिए। इससे किसी प्रकार का दोष नहीं लगता है।
पितृपक्ष के दौरान बाल,दाढ़ी, मूंछ या नाखून काटना की मनाही होती है। अगर इस समय में ऐसा करते हैं, तो इससे जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
इन दिनों में किसी प्रकार का कोई भी शुभ काम नहीं करना चाहिए। इससे उन काम का कोई शुभ फल नहीं मिलता और वह काम पूर्ण भी नहीं होता है।
इन दिनों में व्रत रखा जाता है या कम से कम एक बार भोजन करते समय सात्विक भोजन किया जाता है। बाहर के भोजन या जंक फूड से बचना चाहिए।
इन दिनों सूर्य और चंद्रमा की पूजा करने से पहले पितृ पक्ष की समाप्ति के बाद, इनकी पूजा से परहेज किया जाता है। इसलिए इस समय में पूजा नहीं करना चाहिए।
पितृपक्ष में धार्मिक कार्यों, जैसे कि हवन या पूजा, को पितृपक्ष के नियमों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को इस समय के दौरान पूर्वजों की स्मृति में करना चाहिए।
पितृपक्ष में इन चीजों का परहेज करना चाहिए। एस्ट्रो से जुड़ी ऐसी ही अन्य खबरों के लिए पढ़ते रहें NAIDUNIA.COM