ज्येष्ठ मात्र के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के दिन वट सावित्री का व्रत रखा जाता है। वट सावित्री के दिन सुहागिन महिलाएं वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है।
हर साल सुहागिन महिलाएं अपने पति की सकुशलता एवं दीर्घायु की कामना करते हुए वट सावित्री व्रत रखती हैं।
इस दिन सुहागिन महिलाएं बरगद की पूजा करने तक निर्जला व्रत रखती हैं। इसके बाद, सोलह श्रृंगार करके वट वृक्ष की पूजा करती हैं और बरगद के पेड़ की कोपल खाकर अपना व्रत खोलती हैं।
5 जून की शाम को 7 बजकर 54 मिनट से ज्येष्ठ अमावस्या तिथि आरंभ होगी और इसका समापन अगले दिन 6 जून की शाम 6 बजकर 7 मिनट पर होगा। उदय तिथि के हिसाब से इस वर्ष वट सावित्री व्रत 6 जून दिन गुरुवार को रखा जाएगा।
सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं और वट वृक्ष पर कच्चे सूत बांधकर 108 परिक्रमा करती हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, बरगद के पेड़ में भगवान विष्णु, शिव और भगवान ब्रह्मा का वास होता है। इसलिए, इसकी पूजा अर्चना की जाती है।
बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। ऐसे में इस पेड़ की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है, क्योंकि बरगद के पेड़ की आयु बहुत लंबी होती है।
इस दिन दान करना अति लाभकारी माना गया है। खासकर सुहाग का सामान दान करना शुभ माना गया है। साथ ही, सुहागिन महिलाओं को काले कपडे़ पहनने से बचना चाहिए।
इस तरह से बरगदाही पूजा करें। एस्ट्रो से जुड़ी ऐसी ही अन्य खबरों के लिए पढ़ते रहें NAIDUNIA.COM