यह त्योहार हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस बार यह 15 जून को पड़ रही है। इसमें भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन देवों के देव महादेव की कृपा से माहेश्वरी समाज की वंशोत्पत्ति हुई है। माहेश्वरी समाज के लिए महेश नवमी का विशेष महत्व है।
इस दिन भगवान शिव की पूजा होती है और भगवान शंकर का महिष रूप है, इसीलिए उन्हें महेश कहा जाता है।
महेश नवमी पर व्रत रखा जाता है। इसके लिए सुबह उठकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया जाता है। साथ ही, माता पार्वती और गणेशजी की भी पूजी की जाती है।
भारत की एक हिंदू जाति है, जो मूलरूप से राजस्थान राज्य की रहने वाली है। इसलिए, उनके लिए महेश नवमी का बहुत महत्व है।
इस साल महेश नवमी पर दुर्लभ वरीयान योग का निर्माण हो रहा है। साथ ही, कई अन्य मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग से भगवान शिव की पूजा करने से साधक को अक्षय फल की प्राप्ति होगी।
इस दिन शिव पार्वती की पूजा करके संतान सुख और दांपत्य जीवन में खुशियां आती है। एक लोटे में जल बेलपत्र, धतूरा, फूल आदि लेकर मंदिर में जाकर जल अर्पित करें।
महेश नवमी के दिन तेल, घी, फल, चीनी, वस्त्र आदि चीजों का दान करना चाहिए। इन चीजों का दान करने से सारी मनोकामना पूरी होती है।
इस दिन और इस तरह से महेश नवमी मनाई जाएगी। एस्ट्रो से जुड़ी ऐसी ही अन्य खबरों के लिए पढ़ते रहें NAIDUNIA.COM