शनि देव को न्याय और कर्मफल का देवता कहा जाता है। शनि देव की कृपा से जातकों के सारे काम पूर्ण होते हैं और सफलता प्राप्त होती है।
शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित होता है, शनि देव की कृपा से भक्तों के जीवन की सारी परेशानियां दूर होती हैं।
वैसे शनि देव की पूजा शनि मंदिर में की जाती है लेकिन इनकी मूर्ति घर के मंदिर में रखने की मनाही है। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा आती है।
ऐसी मान्यता है कि घर के मंदिर में शनि देव की मूर्ति रखने से अशुभ फलों की प्राप्ति होती है। ऐसा कहा जाता है कि शनि देव की दृष्टि पड़ने से व्यक्ति को अशुभ फल मिलते हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, शनि देव श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त थे और सदैव उनकी भक्ति में लीन रहते थे। एक बार शनि देव की पत्नी उनसे मिलने आई और तमाम प्रयासों के बावजूद भी शनि देव ने ध्यान नहीं दिया।
इससे गुस्सा होकर उनकी पत्नी ने उन्हें यह श्राप दिया कि जिस पर भी शनि देव की नजर पड़ेगी, उसका अमंगल होगा। बाद में शनि देव को गलती का एहसास हुआ और उन्होंने अपनी पत्नी से श्राप वापस लेने को कहा लेकिन ऐसा संभव नहीं था।
तभी से शनि देव सिर झुकाकर चलते हैं ताकि उनकी वजह से किसी का बुरा न हो। इसी कारण से अधिकतर मंदिरों में शनि देव की मूर्ति की बजाय शिला की पूजा की जाती है।
इसी वजह से शनि देव की मूर्ति घर में नहीं रखी जाती है। यही कारण है कि शनि देव की पूजा करते समय उनके चरणों में देखना चाहिए।
इस वजह से शनि देव की मूर्ति घर में नहीं रखी जाती है। धर्म और आध्यात्म से जुड़ी ऐसी ही अन्य खबरों के लिए पढ़ते रहें NAIDUNIA.COM