
ब्रसेल्स। बेल्जियम में 17 साल का एक लड़का पहला ऐसा बच्चा है, जिसे इच्छामृत्यु दी गई है। गौरतलब है कि दो साल पहले साल 2014 में यह कानून वहां लागू किया गया था। असहनीय शारीरिक दर्द के कारण उसकी इच्छामृत्यु की याचिका को पारित कर दिया गया।
अधिकारियों ने बच्चे की मौत की घोषणा कर दी है। दो साल पहले इच्छामृत्यु अनुरोधों पर आयु के प्रतिबंध को हटा दिया गया था। इस कदम के बाद में बेल्जियम दुनिया का एक मात्र देश बन गया है, जहां किसी भी उम्र के बच्चों घातक इंजेक्शन लगवाकर मृत्यु का चयन कर सकते हैं।
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पड़ोसी नीदरलैंड में कम से कम 12 वर्ष की आयु के बच्चों को ही इच्छामृत्यु पाने के हकदार हैं। बेल्जियम में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के इसके लिए अपने माता-पिता की सहमति लेनी जरूरी होगी। साथ ही ऐसा करने के यह जरूरी होगा कि वे लाइलाज बीमारी के अंतिम चरण में हों।
संसद द्वारा पारित कानून में जोर दिया गया है कि नाबालिग 'असहनीय शारीरिक पीड़ा' को झेल रहा होगा, तो ही उसकी इच्छामृत्यु की याचिका पर विचार किया जा सकेगा। इसके बाद में हाल में इच्छामृत्यु के लिए बनी राष्ट्रीय समिति के प्रमुख ने पहले मामले पर चर्चा की।