इस्लामाबाद। Adnan Sami के पिता Arshad Sami Khan के पाकिस्तानी वायुसेना के पायलट होने की वजह से अदनान सामी को पद्मश्री देने के मोदी सरकार के फैसले पर विवाद खड़ा हो गया है। बड़ी संख्या में लोग कमेंट्स कर रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मोदी सरकार ने ठीक फैसला किया है, वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार डैमेज कंट्रोल के लिए यह कदम उठा रही है। अदनान सामी को पद्मश्री देने के फैसले का विरोध करने वालों का कहना है कि Adnan Sami के पिता Arshad Sami Khan पाकिस्तानी सेना में थे।
अदनान सामी ने यह दावा किया है कि उनके पिता ने क्या किया, यह उनके निजी जीवन का व्यक्तिगत विकल्प था। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उनके पिता उनके जन्म से पहले ही वायुसेना की नौकरी छोड़ चुके थे और उन्होंने अपने पिता को कभी भी वर्दी में नहीं देखा था। जानते हैं अदनान सामी के पिता अरशद सामी खान (Arshad Sami Khan) के बारे में...
भारत के खिलाफ लड़ी थी जंग
अदनान सामी के पिता फ्लाइट लेफ्टिनेंट अरशद सामी खान (Arshad Sami Khan) का जन्म 8 जनवरी 1942 को हुआ था और उनका निधन 22 जून 2009 को हुए था। वह पाकिस्तानी वायुसेना में पायलट थे। उन्होंने भारत के खिलाफ 1965 और 1971 के युद्ध में भाग लिया था। बताया जा रहा है कि उन्होंने इस युद्धों में भारत के एक लड़ाकू विमान, 15 टैंक और 12 वाहनों को नष्ट किया था।
वायुसेना से रिटायरमेंट के बाद रहे राजनीति में सक्रिय
वायुसेना से साल 1972 में रिटायर होने के बाद भी वह पाकिस्तान की सरकार में सक्रिय रहे थे। राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने उन्हें विदेश सेवा में शामिल करवाया। अरशद को स्वीडन डेनमार्क और नॉर्वे सहित 10 अन्य देशों में पाकिस्तान का राजदूत भी बनाया गया था। वह पाकिस्तान के राष्ट्रपतियों गुलाम इशहाक खान, फारूख लगहरी और प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो, गुलाम मुस्तफा और नवाज शरीफ के निजी स्टाफ में भी रहे।
बेनजीर भुट्टो सरकार ने खान पाकिस्तान का पहला कमिश्नर जनरल नियुक्त किया गया था और बाद में उन्हें पाकिस्तान सरकार का संघीय सचिव भी बनाया गया। 14 अगस्त 2012 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने मरणोपरांत अरशद खान को तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार सितारा-ए-इम्तियाज से सम्मानित किया था।
अफगानिस्तान से आया था परिवार
अरशद सामी खान पश्तून परिवार से ताल्लुक रखते थे, जो अफगानिस्तान से पलायन करके पाकिस्तान पहुंचा था। उनके पिता अब्दुल सामी खान पुलिस उपमहानिरीक्षक थे। उनके दादा जनरल महफूज जान अफगानिस्तान के हेरात में रहते थे और वह राजा अमानुल्ला खान के शासन में अफगानिस्तान में 4 प्रांतों हेरात, काबुल, जलालाबाद और बल्ख के गवर्नर थे।
खान के परदादा जनरल अहमद जान सिविल एंड मिलिट्री एडवाइजर के साथ-साथ किंग आमिर अब्दुर रहमान खान के चिकित्सक भी थे। हालांकि, अफगानिस्तान में प्रसिद्ध बाका साकाव/ हबीबुल्लाह काकानी क्रांति के समय अरशद खान के दादा जनरल महफूज जान की हत्या कर दी गई थी और नतीजतन उनके परिवार को पेशावर में पलायन करना पड़ा था, जो उस समय ब्रिटिश भारत का एक हिस्सा था।