इस्लामाबाद। पाकिस्तान की एक आतंकवाद-निरोधी अदालत ने मुंबई हमले के मास्टरमाइंड और जमात-उद-दावा प्रमुख (JuD) हाफिज सईद को टेरर फंडिंग के दो मामलों में पांच-पांच साल जेल की सजा सुनाई है। इससे पहले सईद और उसके सहयोगियों के खिलाफ सभी छह आतंकवादी वित्तपोषण मामलों को एक साथ मिलाने के लिए लगाई गई याचिका को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। बताते चलें कि मुंबई हमले में 166 लोग मारे गए थे।

आतंकवाद निरोधक अदालत 11 दिसंबर से सईद और अन्य के खिलाफ चल रही आतंकी वित्तपोषण मामले की रोजाना सुनवाई कर रही है। सईद के खिलाफ आतंकी फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध कब्जे के कुल 29 मामले दर्ज हैं। सईद के खिलाफ आतंकी फंडिंग के दो मामलों में पाकिस्तान के आतंकरोधी कोर्ट (एटीसी) अब 8 फरवरी को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

कोर्ट को शनिवार को इन दो मामलों पर फैसला सुनाना था, लेकिन उसकी सुनवाई मंगलवार 11 फरवरी को करने का फैसला किया था। एटीसी का कहना था कि फैसला सुनाने से पहले वह सभी मामलों पर सुनवाई कर लेना चाहता है।

इससे पहले कोर्ट ने मंगलवार को हाफिज सईद की वह याचिका स्वीकार कर ली, जिसमें छह मामलों की एकसाथ सुनवाई करने और फैसला सुनाने की मांग की थी। याचिका के अनुसार, सईद, जफर इकबाल, याहया अजीज, अब्दुल रहमान मक्की के खिलाफ चार अन्य आतंकी वित्तपोषण मामले उसी एटीसी के समक्ष लंबित हैं।

पाकिस्तान के अखबार डॉन के हवाले से कहा गया है कि डिप्टी प्रोसेक्यूटर जनरल अब्दुल रऊफ वट्टू ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ छह मामले अदालत में लंबित थे, जिनमें चार में सुबूत पेश करने की प्रक्रिया चल रही थी। उन चारों मामलों की सुनवाई इस सप्ताह के अंत तक कर ली जाएगी। बताते चलें कि सईद को 17 जुलाई को उस वक्त गिरफ्तार किया गया था, जब वह गुजरांवाला से लाहौर जा रहा था।

उसके खिलाफ पंजाब के पांच शहरों में केस दर्ज किए गए और पाया गया कि वह अपने एनजीओ एल अनफाल ट्रस्ट, दावातुल ट्रस्ट, मउज बिन जबाल ट्रस्ट के जरिये फंड जमा करने का काम करता रहा है। पाकिस्तान सरकार ने इन संगठनों पर पिछले साल अप्रैल से ही प्रतिबंध लगा रखा है। आरोप है कि इनके जरिए जमात उद दावा ने बड़ी मात्रा में संपत्ति जमा कर रखी है, जिसका इस्तेमाल वह आतंकवादी गतिविधियों को चलाने के लिए करता है।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai