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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 08, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

उइगर मुस्लिमों के शोषण पर अमेरिका ने ब्लैकलिस्ट की चीन की 28 कंपनियां

प्रतिबंधित की गई कंपनियों में वीडियो सर्विलांस कंपनी हिकविजन और कुछ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस कंपनियां शामिल हैं।

By Shashank Shekhar BajpaiEdited By: Shashank Shekhar Bajpai
Publish Date: Tue, 08 Oct 2019 08:42:33 AM (IST)Updated Date: Tue, 08 Oct 2019 08:42:33 AM (IST)
उइगर मुस्लिमों के शोषण पर अमेरिका ने ब्लैकलिस्ट की चीन की 28 कंपनियां

वॉशिंगटन। चीन के शिनजियांग प्रांत में अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के शोषण की खबरों को गंभीरता से लेते हुए अमेरिका ने बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने घोषणा की है कि वह चीन की 28 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर रहा है। विभाग का कहना है कि शिंगजियांग क्षेत्र में उइगरों और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर इन कंपनियों ने उनके अधिकारों का उल्लंघन किया गया है और उनका शोषण किया है। वाणिज्य सचिव विल्बर रॉस ने इस कदम की घोषणा की। यह प्रतिबंध अमेरिकी उत्पादों की खरीद से ब्लैकलिस्ट की गई कंपनियों को यह कहते हुए रोकती है कि संयुक्त राज्य अमेरिका चीन के भीतर जातीय अल्पसंख्यकों के क्रूर दमन को बर्दाश्त नहीं करता है और न ही करेगा।

प्रतिबंधित की गई कंपनियों में वीडियो सर्विलांस और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस कंपनियां शामिल हैं। बुधवार को प्रकाशित होने जा रहे अमेरिकी फेडरल रजिस्टर के अपडेट के अनुसार, ब्लैकलिस्ट की गई फर्मों में वीडियो सर्विलांस कंपनी हिकविजन के साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियां मेगावी टेक्नोलॉजी और सेंसटाइम शामिल हैं।


अधिकार समूहों का कहना है कि चीन ने पश्चिमी शिनजियांग क्षेत्र के शिक्षा शिविरों में लगभग दस लाख उइगरों और अन्य मुसलमानों को हिरासत में लिया है। वाशिंगटन का कहना है कि यह कदम नाजी जर्मनी की याद दिलाता है। चीन शुरुआत में इन शिविरों के अस्तित्व से इनकार करता रहा था, लेकिन उसने अब दावा किया कि ये 'व्यावसायिक प्रशिक्षण स्कूल' हैं, जो आतंकवाद को नियंत्रित करने के लिए जरूरी हैं।

इसके साथ ही चीन ने इसे देश का आंतरिक मामला करार दिया है। चीन का कहना है कि वह इस मामले में किसी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगा। बताते चलें कि अमेरिका ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब चीन के साथ उसका व्यापार युद्ध चल रहा है और इससे पहले चीन की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी हुवेई पर भी वॉशिंगटन प्रतिबंध लगा चुका है।